ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में प्रोन्नति के एक मामले पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। साथ ही, विभागीय निदेशक को तीन सप्ताह में प्रकरण का निस्तारण करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने माना कि इस प्रकरण में विभाग के अधिकारियों ने संबंधित कर्मचारियों को प्रोन्नति देने पर विचार ही नहीं किया। न्यायमूर्ति मनीष माथुर ने यह आदेश अशोक कुमार त्रिवेदी व अन्य की याचिका पर दिया।
याचिका में कहा गया कि याचीगण विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मी के पद पर तैनात हैं। उन्हें वरिष्ठता के आधार पर तृतीय श्रेणी में प्रोन्नति मिलनी चाहिए थी, जो उन्हें नहीं दी गई। रिट कोर्ट ने विभाग के अधिकारियों को इस प्रकरण पर गौर करने को कहा था, पर याचियों के मामले के नकार दिया गया। याचियों के मामले पर गौर करने के बजाय अधिकारियों ने दूसरे डिवीजन के कर्मचारियों को प्रोन्नति दे दी।
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के वकील ने अधिकारियों के आदेश को सही ठहराया। वहीं, याचियों के वकील ने दलील दी कि विभाग में प्रोन्नति के पद अब भी शेष हैं, जिन पर याचियों को अवसर मिलना चाहिए। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि याचियों को प्रोन्नति मिलने का अधिकार है।
कोर्ट ने विभाग के निदेशक व अधिशासी अभियंता को आदेश दिए कि अगर प्रोन्नति वाले पद रिक्त हैं तो उन पर याचियों के मामले में गौर करते हुए उन्हें प्रोन्नति दी जानी चाहिए। कोर्ट ने इस मामले में तीन सप्ताह में कार्यवाही करने के आदेश दिए हैं।