वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को अब जम्मूतवी के बाद दो घंटे की बस यात्रा नहीं करनी होगी। लखनऊ से कटरा तक नए वित्तीय वर्ष में नई प्रीमियम ट्रेन मिलेगी। वहीं, पुणे जाने वाले यात्रियों की मुश्किलें भी कम होंगी।
अंतरिम रेल बजट में लखनऊ-पुणे साप्ताहिक ट्रेन सहित 10 नई ट्रेनों का तोहफा मिला है। इसमें सात मेल व एक्सप्रेस तो तीन प्रीमियम ट्रेनें शामिल हैं। प्रीमियम ट्रेनों का संचालन गोरखपुर से दिल्ली और गोरखपुर से मुंबई के बीच किया जाएगा लेकिन ये ट्रेनें लखनऊ होकर गुजरेंगी।
रायबरेली व अमेठी का ध्यान रखते हुए आनंद विहार से माल्दा टाउन के लिए रायबरेली होकर भी एक नई ट्रेन बजट में दी गई है।
विनामों की तर्ज पर होगी बुकिंग
लखनऊ से मुंबई व दिल्ली जाने वाले यात्रियों के लिए सप्ताह में दो दिन प्रीमियम ट्रेनें चलेंगी। पूरी तरह एसी वाली इस ट्रेन का किराया विमान की तर्ज पर होगा। पहले बुकिंग कराने पर किराया कम तो बाद में अधिक होगा।
हालांकि इससे पहले लखनऊ इलाहाबाद जन शताब्दी में भी अधिक किराए वाली सेवा शुरू हुई थी लेकिन बाद में बंद कर दी गई। पुणे के लिए अब तक सप्ताह में एक दिन रविवार को ट्रेन संख्या 12104 रवाना होती है।
अब सप्ताह में तीन दिन यात्रियों को पुणे की सीधी ट्रेन मिल सकेगी। इसमें एक दिन लखनऊ से और एक दिन गोरखपुर से लखनऊ होकर पुणे की ट्रेन मिलेगी।
इसी तरह ऐशबाग-पीलीभीत के आमान परिवर्तन के कारण लालकुआं जाने वाली नैनीताल एक्सप्रेस के बरेली तक सीमित होने की वजह से नैनीताल जाने वाले सैलानियों और पर्वतीय समाज के लोगों के लिए केवल बाघ एक्सप्रेस का ही सहारा था।
अब सीटों की नहीं होगी दिक्कत
हावड़ा से आने के कारण बाघ एक्सप्रेस में लखनऊ के यात्रियों को सीटें ही नहीं मिल पाती हैं।
अब सप्ताह में तीन दिन लखनऊ से काठगोदाम तक सीधी ट्रेन मिलने से उनकी दिक्कत दूर हो सकेगी। नई ट्रेनों में लखनऊ-बांद्रा और लखनऊ अहमदाबाद लखनऊ जंक्शन से चलेंगी।
जबकि लखनऊ-पुणे और लखनऊ-काठगोदाम व गोरखपुर पुणे एक्सप्रेस चारबाग स्टेशन से रवाना होगी।
ये मांगें नहीं हो सकीं पूरी
बजट में फिलहाल गोमतीनगर टर्मिनल के दूसरे चरण के काम के लिए बजट में कोई व्यवस्था नहीं की गई। लखनऊ में ईएमयू कार शेड की स्थापना जैसे कई प्रस्तावों को बजट में शामिल ही नहीं किया गया।
लखनऊ से गोवा जाने के लिए सीधी ट्रेन की मांग इस बार भी पूरी नहीं हो सकी। जनरल बोगी में घुसने के लिए सुबह से लंबी लाइन लगाने वाले यात्रियों को इस बार भी मायूस होना पड़ा।
लखनऊ से मुंबई के लिए रोजाना एक अनारक्षित श्रेणी की ट्रेन चलाने का प्रस्ताव भी बजट में शामिल न हो सका। चारबाग को विश्वस्तरीय स्टेशन बनाने जैसी पिछली कई घोषणाओं के लिए इस बजट में कोई प्रावधान ही नहीं किया गया।
नई दिल्ली-कानपुर मेमू ट्रेन का विस्तार लखनऊ होकर गोरखपुर तक करने का प्रस्ताव भी रेल बजट में मंजूर नहीं हो सका। कानपुर तक लटककर यात्रा करने वाले दैनिक यात्रियों के लिए एक नई मेमू सेवा शुरू करने की मांग भी इस बजट में पूरी न हुई।
कहां गईं पिछले बजट की घोषणाएं
तीन सालों में रेल बजट के दौरान जमकर लोक लुभावन वायदे तो कर दिए गए, लेकिन हकीकत यह है कि वह अब ठंडे बस्ते में पहुंच गई हैं। इस रेल बजट में संतोषजनक बात यह रही कि किसी तरह के सुनहरे ख्वाब यात्रियों को नहीं दिखाए गए, लेकिन पिछली घोषणाएं कहां लापता हो गईं। यह सवाल हर एक के जेहन में है।
लखनऊ में एक बेस किचन खोलने की घोषणा हुई थी, लेकिन तीन साल से उस पर कोई अमल नहीं हो सका। रेलवे केवल चारबाग के रेल आरक्षण केंद्र को बेस किचन के लिए चुन सका है। यहां रोजाना 12 हजार थाली स्वच्छ भोजन पकाया जाना था।
ट्रेनों मे गंदे बिस्तरों की शिकायत को दूर करने के लिए लखनऊ में एक मैकेनाइज्ड लांड्री खोली जानी थी। पूर्वोत्तर रेलवे के गोरखपुर स्टेशन पर यह मैकेनाइज्ड लांड्री खुल गई और लखनऊ जंक्शन पर यह जून में खुलेगी। जबकि चारबाग स्टेशन पर यह लांड्री अब तक खोले जाने की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई है।
रेलवे कर्मचारियों के बच्चों को डॉक्टर बनाने के लिए मेडिकल कॉलेज खोलने और नर्सिंग कॉलेज की घोषणा के नाम पर केवल ट्रांसपोर्टनगर में जमीन चिह्नित हो सकी है। रेलवे की भूमि पर केंद्रीय विद्यालय खोलने और पॉलीटेक्निक बनाने व अस्पताल के निर्माण जैसी घोषणाएं अब ठंडे बस्ते में पहुंच गई हैं।
खुली हैं मौत की क्रॉसिंग
पांच साल से हर बार यह लक्ष्य रखा गया कि वर्ष 2013 तक सभी मानवरहित क्रॉसिंग पर चौकीदार तैनात किए जाएंगे। देश भर में 28 हजार रेलवे क्रॉसिंग मानवरहित है।
जहां करीब 40 प्रतिशत घटनाएं हो रही हैं। उत्तर रेलवे के चार जोनल के नौ रेल मंडलों में मानवरहित क्रॉसिंग की संख्या 2500 से अधिक है। यह गुजरात के बाद देश में सबसे अधिक है।
उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल में करीब 411 और पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल में 350 से अधिक मानवरहित क्रॉसिंग पर अब भी चौकीदार तैनात नहीं हो सके हैं।
नहीं बन पाया विश्वस्तरीय स्टेशन
वर्ष 2010-11 के रेल बजट में तत्कालीन रेलमंत्री ममता बनर्जी ने महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए ट्रेनों में महिला कमांडो की तैनाती की घोषणा की थी। अब तक ट्रेनों में महिला कमांडो तो दूर महिला कांस्टेबल तक तैनात नहीं हो सकी हैं। आए दिन ट्रेनों में महिला यात्रियों से छेड़खानी जैसी घटनाएं हो रही हैं।
चारबाग को विश्वस्तरीय स्टेशन बनाने की घोषणा पिछले कई बजट में की गई। हर बार यहां स्टेशन पर ही बजट होटल, शापिंग माल, एक्सलेरेटर जैसी सुविधा देने के सपने दिखाए गए। यहां तक कि जिस अधिकारी को विश्वस्तरीय परियोजना के लिए तैनात किया गया उसे वहां से हटा दिया गया।
वर्ष 2011-12 के रेल बजट में उतरेटिया से इलाहाबाद तक रेल दोहरीकरण की घोषणा हुई। बुधवार को एक बार फिर इलाहाबाद से रायबरेली तक दोहरीकरण की घोषणा हो गई। जबकि पिछली घोषणा पर अब तक अमल नहीं हुआ।
लेकिन नहीं बदलेगी इस स्टेशन की सूरत
सन 1970 में जिस चारबाग रेलवे स्टेशन पर सात प्लेटफार्म बनाए गए थे, वहां उस समय ट्रेनों की संख्या 142 थी। पिछले 44 साल में एक भी प्लेटफार्म नहीं बढ़े, लेकिन ट्रेनों की संख्या 270 पहुंच गई। चारबाग रेलवे स्टेशन पर जितनी तेजी से ट्रेनों का भार बढ़ा, उतना ही अधिक इसकी दुर्गति भी बढ़ गई।
चारबाग स्टेशन के सभी प्लेटफार्म की फर्श टूट रही हैं। यहां बैठकर इंतजार करते समय बड़े-बड़े गड्ढों से चूहे बाहर निकलकर यात्रियों को काट तक लेते हैं। स्टेशन पर लोहे के बने पैदल पुल की हालत भी बिगड़ रही है।
प्रदेश की राजधानी होने के बावजूद इस स्टेशन का रखरखाव करने के लिए बजट में धन की व्यवस्था तक नहीं हो सकी है। प्लेटफार्मों पर बैठने के लिए सीटें तक नहीं हैं।
चारबाग स्टेशन का जीर्णोद्धार करने के लिए 4 से पांच करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी। जबकि जीएम हेड से यह बजट मिल पाना मुश्किल है। रेल बजट से चारबाग स्टेशन के सुंदरीकरण के लिए कुछ राशि मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा कुछ भी न हुआ।
थम गया गोमतीनगर टर्मिनल बनाने काम
जिस गोमतीनगर हॉल्ट को टर्मिनल बनाने का काम जोर-शोर से शुरू हुआ था। उसका विकास का पहिया आखिरकार थम गया। रेल बजट में गोमतीनगर टर्मिनल के दूसरे चरण के निर्माण के लिए राशि ही आवंटित नहीं की गई।
पहले चरण में गोमतीनगर हॉल्ट को स्टेशन बनाने के लिए दो अतिरिक्त प्लेटफॉर्मा का निर्माण कर लिया गया है। इसके लिए वर्ष 2013-14 के बजट में 50 लाख रुपये आवंटित किया गया था।
दूसरे चरण में करीब 86 लाख रुपये की जरूरत है। इसका प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को रेल बजट में शामिल करने के लिए भेजा गया था। अंतरिम रेल बजट में दूसरे चरण के लिए राशि जारी ही नहीं की गई है। पहले चरण का काम पूरा होने के बाद अब रेलवे के सामने एक बार फिर धन का संकट खड़ा हो गया है।