लड़कियों की खरीद फरोख्त करने वाला गिरोह अकेली किशोरियों या युवतियों को निशाना बनाता था। कृष्णानगर इलाके से जिस किशोरी को आरोपी संतोष बेचने ले गया था, वह 28 जून को एक स्कूल के पास अकेली मिली थी। संतोष ने उससे बातचीत की तो पता चला कि किशोरी धार्मिक है और मथुरा जाना चाहती है।
संतोष ने इसी बात का फायदा उठाकर किशोरी को झांसे में लिया और 30 जून को चारबाग रेलवे स्टेशन पर बुलाया था। किशोरी 30 जून को स्टेशन पहुंची और संतोष के साथ चली गई। एसीपी विकास कुमार पांडेय के मुताबिक पूछताछ में संतोष ने बताया कि वह दो साल तक छत्तीसगढ़ जेल में बंद था। मनीष भंडारी भी जेल में था। वर्ष 2024 में संतोष जेल से छूटा था। संतोष 12 साल से मानव तस्करी कर रहा है। उसने अब तक 15 से ज्यादा लड़कियों को बेचने की बात कबूल की है।
पुलिस अब दोनों आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। संतोष ने बताया कि वह चारबाग रेलवे स्टेशन और आलमबाग बस स्टेशन पर अकेली लड़कियों पर नजर रखता था। ऐसी लड़कियां जल्दी उसके झांसे में आ जाती थीं, जो घर से नाराज होकर निकली होती थीं।
कृष्णानगर में रहने वाले सीएम सुरक्षा में तैनात पीएसओ की 16 वर्षीय बेटी पिताको मेसेज कर घर से निकल गई थी। बिटिया ने पिता को भेजे वॉइस मेसेज में बोला था कि पापा, मुझे मत खोजना भगवान के पास जा रही हूं...। पिता ने कृष्णानगर थाने में 30 जून को बेटी की गुमशुदगी दर्ज कराई। छानबीन में पता चला कि किशोरी घर में रखी भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की मूर्ति लेकर गई थी। डीसीपी ने बताया कि किशोरी मथुरा में प्रेमानंद जी महाराज से मिलने के लिए निकली थी। संतोष ने किशोरी को बहलाकर मथुरा ले जाने की बात कही। इसके बाद उसे कानपुर ले गया और फिर दो दिन प्रयागराज स्थित अपने घर पर रखा।
एक अन्य किशोरी भी मिली संतोष किशोरी को लेकर अपने साथी मनीष के पास पहुंचा और 50 हजार रुपये में उसे बेच दिया। किशोरी को मनीष के पास छोड़कर आरोपी वापस आने लगा। इसकी जानकारी होने पर किशोरी ने रोना शुरू कर दिया। पकड़े जाने के डर से मनीष ने किशोरी को साथ रखने से मना कर दिया और रकम वापस मांगी। संतोष ने उसे 45 हजार रुपये वापस कर दिए और किशोरी को लेकर लौट आया। उधर, किशोरी की तलाश में छह टीमें गठित की गईं। पुलिस टीम ने आठ जुलाई को किशोरी को खोज लिया। पूछताछ में किशोरी ने आपबीती बताई। इसके बाद बृहस्पतिवार को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। संतोष के पास से रायबरेली की एक अन्य किशोरी भी मिली है। परिजनों को पुलिस ने सूचना दे दी है।
संतोष पर दर्ज हैं छह एफआईआर आरोपी संतोष कक्षा तीन तक पढ़ा है, जबकि मनीष ने आठवीं तक की पढ़ाई की है। वह एक ट्रेवेल्स में गाड़ी भी चलाता था। संतोष पर प्रयागराज, वाराणसी, छत्तीसगढ़, प्रतापगढ़ और लखनऊ में कुल छह केस दर्ज हैं। वहीं, मनीष पर दो केस पंजीकृत हैं। डीसीपी ने बताया कि इस राजफाश में कृष्णानगर थाने और सर्विलांस की टीम ने अहम भूमिका निभाई। टीम को 25 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा।
मानव तस्करी की बढ़ती घटनाओं के बीच अभिभावकों को सतर्क रहने की जरूरत है। विशेषज्ञ कहते हैं कि बच्चों की लगातार काउंसिलिंग करें। बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट और उनके दोस्तों के बारे में जानकारी रखें। ऐसा व्यवहार रखें कि बच्चे अपने मन की बात आपसे बता सकें। संभव हो तो रात में भोजन के दौरान उनसे दिनभर की गतिविधियों के बारे में पूछे।
राजस्थान में बेची गईं सबसे ज्यादा लड़कियां
पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह ने सबसे ज्यादा राजस्थान में लड़कियों को बेचा है। आरोपियों के साथी मध्य प्रदेश में सक्रिय हैं। लड़कियों को सबसे पहले मध्य प्रदेश ही ले जाया जाता है। यहां से उन्हें राजस्थान ले जाते हैं। हाल में ही घर से नाराज होकर निकली किशोरी को मानव तस्करी गिरोह ने जाल में फंसा लिया था। इसके बाद बच्ची को 2.75 लाख रुपये में राजस्थान के सीकर में एक व्यक्ति को बेच दिया था।
शादी के लिए बेचने पर मिलते थे लाखों
आरोपियों ने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड और राजस्थान समेत अन्य राज्यों में लड़कियों को बेचा है। संतोष ज्यादातर यूपी से ही लड़कियों को बहला फुसलाकर ले गया है। बताया कि जिन लोगों की शादी नहीं हो पाती थी वे लड़कियों की मांग करते थे और लाखों रुपये देते थे।