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लखनऊ: बाढ़ के पानी में आठ डूबे, सात को बचाया, एक युवक की मौत, नाराज लोगों ने किया प्रदर्शन

Tue, 06 Oct 2026 07:51 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

ग्रामीणों का आरोप है कि सुबह के समय नाव नहीं होने के कारण लोगों को पैदल ही बाढ़ के पानी से होकर जाना पड़ा। इसके कारण हादसा हुआ। 
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लखनऊ में बाढ़ जैसे हालात। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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लासा गांव में मंगलवार को आठ लोग बाढ़ के पानी में डूब गए। सभी शौच जाने के लिए बाढ़ के पानी से होकर इटौंजा-माल रोड जा रहे थे। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद किसी तरह सात लोगों को बचा लिया, जबकि विमल (18) की मौत हो गई। तीन घंटे की मेहनत के बाद किसी तरह विमल का शव बाहर निकाला जा सका।

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ग्रामीणों के मुताबिक मंगलवार सुबह लगभग साढ़े सात बजे लासा गांव से अनुराग, हिमांशु, शिवम, श्रीकांत, विमल, रोशन, राम हरख और रविंद्र नाव न होने से पैदल ही लगभग चार फिट गहरे पानी से होकर इटौंजा माल रोड पर शौच के लिए निकल रहे थे। लासा मंदिर के सामने लगभग पांच फुट गहरे पानी में पहुंचने पर रोड से नीचे गहराई में चले गए। सभी डूबने लगे और बचाने के लिए शोर मचाया। चीख पुकार सुनकर ग्रामीण जमा हो गए। किसी प्रकार सात लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन विमल गहरे पानी में डूब गया।

एनडीआरएफ और पीएसी नहीं ढूंढ़ पाई शव, ग्रामीणों ने निकाला
ग्रामीणों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। जानकारी पाकर सुबह 8:45 बजे एनडीआरएफ मौके पर पहुंची। पीएसी की एक और एनडीआरएफ की दो बोट की मदद से रेस्क्यू शुरू हुआ। साढ़े तीन घंटे के प्रयास पर भी जब सफलता नहीं मिली तो ग्रामीण नाराज हो गए। इसके बाद जमखनवा, दुघरा और हरदा के ग्रामीणों ने देसी तरीके से जाल और कांटा डालकर शव को सुबह 11:30 बजे निकाल लिया।
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नाराज ग्रामीणों ने किया हंगामा
ग्रामीणों का आरोप है कि सुबह के समय नाव नहीं होने के कारण लोगों को पैदल ही बाढ़ के पानी से होकर जाना पड़ा। इसके कारण यह हादसा हुआ। हालांकि, प्रशासन ने बताया कि सुबह से ही नाव उपलब्ध थी। घटनास्थल पर हंगामा प्रदर्शन और रोड जाम की सूचना पर लगभग छह थानों की पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, एनडीआरएफ और पीएसी की टीम मौके पर पहुंची। ग्रामीणों ने एसडीएम बख्शी का तालाब के खिलाफ आक्रोश दिखाते हुए इटौंजा माल रोड जाम कर दिया। हंगामा बढ़ता देख पुलिस किसी तरह समझाकर रास्ता साफ करा दिया। इंस्पेक्टर इटौंजा सोबरन सिंह ने बताया कि विमल के परिवार में भाई अनूप, छह शादीशुदा बहनों के साथ पिता कृष्ण कुमार और मां हैं। परिवार में कोहराम मचा हुआ है।

फसल मुआवजा, छोटे बेटे को नौकरी का लिखित आश्वासन
ग्रामीण और परिजन शव को लेकर गांव चले गए और अंतिम संस्कार से मना कर दिया। पीड़ित परिवार ने आर्थिक मदद, नौकरी, फसल नुकसान का मुआवजा देने की मांग की। इसके बाद डीसीपी, एसीपी, एसडीएम और तहसीलदार के लिखित आश्वासन पर परिजन मान गए। करीब ढाई घंटे बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका।

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