सिविल अस्पताल में एक्स-रे जांच की सुविधा के बाद भी डॉक्टरों और दलालों की मिलीभगत से बाहर से जांच करवा दी। मरीज को बाहर से एक्स-रे जांच कराने की सूचना मिली तो अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) ने मरीज को बुलाया।
जांच की गई तो पता चला कि डॉक्टर ने साथ में बैठे रेजिडेंट डॉक्टर से जांच का पर्चा भरने के लिए कहा। इसके बाद वहां पर तैनात एक दलाल और अन्य कर्मचारियों ने कह दिया कि अस्पताल में ये जांच संभव नहीं है।
इसके बाद मरीज बाहर से जांच कराने चला गया। मामले की जानकारी के बाद जांच पड़ताल में डॉक्टरों और दलालों की करतूत से एमएस भड़क गए। डॉक्टरों को फटकार लगाते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की बात दोबारा सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी।
बाराबंकी, परेवा गांव के तेज नारायण के बेटे नीरज वर्मा (20) को रविवार शाम दाहिने पैर की एड़ी में चोट लग गई। नीरज ने बताया कि सोमवार सुबह ओपीडी नंबर-18 में पहुंचे तो डॉक्टर ने एंकल की एक्स-रे कराने की सलाह दी।
रेजिडेंट ने जांच का पर्चा भर दिया। इसके बाद वहीं पर टेबल पर बैठे एक युवक ने पर्चा देखा और बता दिया कि ये जांच अस्पताल में संभव नहीं है। अस्पताल के सामने पार्क डायग्नोस्टिक से जांच करा लो। रिपोर्ट भी जल्दी मिल जाएगी।
मरीज ओपीडी के भीतर बैठे दलाल और डॉक्टरों के जाल में फंसकर निजी डायग्नोस्टिक सेंटर पहुंच गया। मरीज से 480 रुपये जमा कराने के बाद जांच हो गई। जांच की एक्स-रे फिल्म दिखाई तो डॉक्टर ने कह दिया कि जब रिपोर्ट आएगी तब असली चीज निकलेगी।
अस्पताल की ओपीडी में बैठते हैं दलाल
डेमो
मरीज को दवा लिखकर चलता कर दिया। मामले की जानकारी अस्पताल के एक कर्मचारी ने एमएस को दी। इसके बाद मरीज को ढूंढा गया। पता चला कि ओपीडी में बैठे हड्डी के डॉक्टर, रेजिडेंट, दलाल और ओपीडी अटेंडेंट के सहारे बाहर से जांच का धंधा चल रहा है।
एमएस ने पूरे मामले पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अस्पताल में जांच की सुविधा है, इसके बाद भी डॉक्टर इस तरह का काम कर रहे हैं तो ये शर्मनाक है।
उन्होंने डॉक्टरों से लेकर रेजिडेंट और स्टाफ को फटकार लगाया। उन्होंने कहा कि दोबारा इस तरह का कोई मामला सामने आता है तो संबंधित चिकित्सक को शासन में जवाब देना होगा।
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और निजी डायग्नोस्टिक सेंटर के गठजोड़ और कमीशन के धंधे पर स्वास्थ्य मंत्री शिवाकांत ओझा तक कह चुके हैं कि डॉक्टर ओपीडी में दलाल लेकर बैठते हैं।
ऐसी ही कुछ डॉक्टरों की कारगुजारी ने मरीजों की मुश्किल बढ़ा दी है।अस्पताल में जांच की सुविधा के बाद कमीशन के फेर में बाहर से जांच कराई जा रही है।ओपीडी नंबर 18 में बैठे हड्डी के डॉक्टर ने बाहर से एक्स-रे जांच लिख दी और कह दिया कि यहां जांच संभव नहीं है। जबकि अस्पताल में करीब एक साल पहले सरकार ने एक करोड़ से अधिक की लागत की डिजिटल एक्स-रे मशीन लगाई जिससे जांच पूरी तरह मुफ्त है।
प्लास्टर के नाम पर भी जमकर वसूली
डेमो
- फोटो : अमर उजाला
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और निजी डायग्नोस्टिक सेंटर के गठजोड़ और कमीशन के धंधे पर स्वास्थ्य मंत्री शिवाकांत ओझा तक कह चुके हैं कि डॉक्टर ओपीडी में मिलकर दलाल लेकर बैठते हैं।
ऐसी ही कुछ डॉक्टरों की कारगुजारी ने मरीजों की मुश्किल बढ़ा दी है। अस्पताल में जांच की सुविधा के बाद कमीशन के फेर में बाहर से जांच कराई जा रही है।
सिविल अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में मरीजों का इलाज पैसा कमाने का जरिया बन गया है।
ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले इंप्लांट से लेकर प्लास्टर तक के लिए दलाल अस्पताल के डॉक्टरों का चक्कर काटते हैं।अस्पताल में एक्रेलिक प्लास्टर बाजार से सस्ती दर पर चढ़ाने का धंधा जोरों पर है।
डॉक्टर और कर्मचारी मरीजों को बता देते हैं कि अस्पताल में पीओपी से लगने वाला प्लास्टर बहुत भारी होता है और खुजली होती है। सूत्रों की मानें तो अस्पताल में जांच व इलाज के नाम पर हर स्तर पर कमीशनबाजी हो रही है।
अस्पताल के कर्मचारी इमरजेंसी से लेकर हड्डी वार्ड तक मरीजों से वसूली में लगे हैं। दोपहर दो बजे के बाद इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को तुरंत जांच का झांसा देकर निजी पैथोलॉजी से जांच कराई जाती है और रिपोर्ट छुपाकर रखने की सलाह दी जाती है। इस पूरे खेल में डॉक्टर भी मिले हैं और अधिकारियों की आंख में धूल झोंककर मरीजों की जेब में डाका डाला जा रहा है।
‘मरीज को बाहर से एक्स-रे जांच कराने का मामला सामने आया था। मामले को गंभीरता से लेते हुए पूछताछ के बाद चेतावनी दी गई है। कोई डॉक्टर बाहर से दवा जांच लिखता है तो सीधे मुझसे शिकायत करें। मैं कार्रवाई करूंगा’।- डॉ. आशुतोष दुबे, एमएस, सिविल अस्पताल