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लोकसभा अध्यक्ष ने किया ई-विधान प्रणाली का शुभारंभ : योगी ने कहा- जनता से संवाद भी करते रहें नहीं तो कहेगी, वोट भी वर्चुअली ले लेना

Fri, 20 May 2022 09:21 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

मुख्यमंत्री के कंप्यूटर ज्ञान पर अक्सर तंज कसने वाले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव उस समय अचंभित दिखे, जब ई-विधान प्रणाली का शुभारंभ हुआ। इस नई प्रणाली की खासियत सुनकर उन्होंने इस व्यवस्था की जमकर तारीफ की।
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यूपी विधानसभा में डिजिटल प्रणाली शुभारंभ होने पर लोकसभा अध्यक्ष, सीएम योगी, अखिलेश यादव व अन्य - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी विधानसभा में शुक्रवार से ई-विधान प्रणाली लागू हो गया। अब से विधानसभा की पूरी कार्यवाही पेपरलेस होगी। इस अवसर पर 18वीं विस के नये सदस्यों का प्रबोधन कार्यक्रम हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधायकों को सलाह दी कि वे तकनीक से भागें नहीं, उसे अंगीकार करें, लेकिन इस बात का भी ध्यान रखें कि तकनीक का पिछलग्गू भी न बनें। तकनीक के इस्तेमाल के साथ-साथ क्षेत्र में खुद जाएं और वहां जनता से संवाद करना कतई न भूले, नहीं तो जनता भी चुनाव के मौके पर यही कहेगी कि अब वोट भी वर्चुअली ले लेना। उन्होंने कहा कि विधायकों द्वारा जनता की समस्याओं के समाधान में तकनीक का इस्तेमाल कर सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। सरकार द्वारा तैयार किए गए ई-विधान प्रणाली और विधायकों के प्रबोधन कार्यक्रम का शुभारंभ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया।

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लोकसभा अध्यक्ष ने शोरशराबे पर जताई चिंता
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदनों में सदस्यों द्वारा किए शोर-शराबे पर चिंता जताते हुए कहा कि इस वजह से कानून बनाने केप्रस्तावों पर सदनों में चर्चा और संवाद में कमी आ रही है। सदन में व्यवधान करने या तख्तियां दिखाने से न तो सदस्यों की प्रतिष्ठा बढ़ती है और न ही सदन की गरिमा।

अखिलेश बोले- तकनीक से आएगी पारदर्शिता
नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार के कामकाज में जितनी तकनीक का इस्तेमाल बढ़ेगा, उतनी पारदर्शिता आएगी। सरकार की जहां जवाबदेही बढ़ेगी, वहीं भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा।
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पेपरलेस बजट, ई-कैबिनेट के बाद अब पूरी कार्यवाही कागज रहित : योगी
इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ई-विधान प्रणाली को लागू करने पर विधानसभा अध्यक्ष को बधाई देते हुए कहा कि हम सदन में उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता के हित के लिए चिंतन-मनन करने के लिए आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल मिशन को बढ़ाते हुए ‘वन नेशन, वन एप्लिकेशन’ के भाव के साथ विधानसभा में ई-विधान प्रणाली लागू की गई है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने दो साल पहले ही कागज रहित बजट पेश करके एक नया प्रयोग किया था। इसी प्रकार ई-कैबिनेट की शुरूआत की गई है। इसी कड़ी में अब विधानसभा की पूरी कार्यवाही को कागज रहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 23 मई से शुरू हो रहे सत्र में जरूरत के अनुसार दस्तावेजों की हार्डकॉपी मिल सकेगी, लेकिन आगामी सत्रों से सब कुछ पूरी तरह पेपरलेस होगा। नई प्रणाली से परिचय कराते हुए उन्होंने विधायकों को बताया कि अब सदन में आपको बहुत मोटा बैग लाने की जरूरत नहीं होगी। अब ई-विधान के बाद आपका काम सरल हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा तकनीक को लोककल्याण के लिए उपयोगी बनाने से अच्छे परिणाम सामने आएंगे।

 

कानून बनाते समय जनता से संवाद जरूरी: ओम बिरला

प्रदेश के इतिहास में शुक्रवार को एक नया अध्याय जुड़ गया। अब से विधानमंडल की सभी कार्यवाही कागज रहित (पेपरलेस) होगी। ऐसा करने वाला यूपी देश का पहला राज्य बन गया है। कागज रहित कार्यप्रणाली व्यवस्था अभी तक किसी भी प्रदेश के विधानमंडल में लागू नहीं है। योगी सरकार के इस नई पहल के तहत 23 मई से शुरू हो रहे विधानमंडल सत्र ई-विधान प्रणाली से संचालित होगा और इस बार का बजट भी कागज रहित पेश किया जाएगा। सरकार द्वारा तैयार किए गए ई-विधान प्रणाली और विधायकों के प्रबोधन कार्यक्रम का शुभारंभ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव समेत सभी विधायक मौजूद रहे।

विधानमंडप में आयोजित ई-विधान प्रणाली के शुभारंभ व 18वीं विस के नये सदस्यों के प्रबोधन  कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संसद और विधानमंडल का मूल काम कानून बनाना है। जनता से चुनकर आने वाले जनप्रनिधियों पर एक ऐसा कानून बनाने की जिम्मेदारी है, जो आम जनता के लिए कल्याणकारी हो। इसलिए कानून बनाते समय जनता से संवाद करके ही कानून बनाया जाना चाहिए। तभी उस कानून की सार्थकता होगी। उन्होंने विधायकों से आग्रह करते हुए कहा कि कानून बनाते समय विधानमंडल में प्रस्तावित कानून पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए और उसमें जनता के सुझाव को भी शामिल किया जाना चाहिए। तभी एक सशक्त और प्रभावी कानून बन सकेगा।  

ओम बिरला ने आये दिन सदनों में सदस्यों द्वारा किए शोर-शराबे पर चिंता जताते हुए कहा कि इस वजह से कानून बनाने केप्रस्तावों पर सदनों में चर्चा और संवाद में कमी आ रही है। उन्होंने विधायकों को सलाह देते हुए कहा कि कानून बनाते समय इस पर व्यापक चर्चा और संवाद करना चाहिए और इससे पहले जनता से भी संवाद करें। सदनों में आए दिन नारेबाजी व हंगामा पर भी चिंता जताते हुए कहा कि इससे सदनों की गरिमा गिरती जा रही है। उन्होंने कहा कि सदन के सदस्यों के आचरण और व्यवहार से ही सदन की गरिमा और मर्यादा बनती है। सदन में व्यवधान करने या तख्तियां दिखाने से न तो सदस्यों की प्रतिष्ठा बढ़ती है और न ही सदन की गरिमा।

सार्थक संवाद की जरूरत पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि नारेबाजी और हंगामे की बजाय सदन में तर्कपूर्ण संवाद के जरिये सदस्यों को अपनी बात रखनी चाहिए और सदन में तर्कों के साथ बहस होनी चाहिए। जितना सार्थक संवाद होगा, सरकार को भी जनहित की योजनाओ के क्रियान्वयन में उतनी ही मदद मिलेगी। देश के जो बड़े नेता विधानमंडलों से निकले हैं, वे तर्कों के जरिये ही अपनी बात रखते हैं। उन्होंने विधायकों को सलाह देते हुए कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए हमें तर्क केसाथ अपनी बात रखनी चाहिए। तर्कशक्ति को बेहतर करके ही सर्वश्रेष्ठ नेता बन सकते हैं। उन्होंने विधायकों की क्षमता वृद्धि के लिए समय-समय पर कार्यक्रमों के आयोजन पर बल देते हुए कहा कि इससे विधायकों की तर्क क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने इसके लिए लाइब्रेरी, संग्रहालय और रिसर्च जैसे संसाधन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।

लोकसभा अध्यक्ष ने ई-विधान प्रणाली शुरू करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रणाली के लागू होने से 128 नये सदस्यों के साथ ही सभी पुराने विधायकों को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि नयी प्रणाली का सभी सदस्य मिलकर लाभ उठाएंगे और प्रदेश के समावेशी विकास में योगदान देंगे।  उन्होंने कहा सूचना प्रद्योगिकी के इस्तेमाल से शासन और प्रशासन में पारदर्शिता लाने में मदद मिलेगी।

विधायकों की गैरमौजूदगी पर जताई चिंता
इस मौकेपर उप मुख्यमंत्री केशव मौर्या समेत कई कैबिनेट व राज्यमंत्री कार्यक्रम में नहीं पहुंचे थे। इसी प्रकार कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता अराधना मिश्रा मोना समेत सत्ता और विपक्ष के कई सदस्य भी गैरहाजिर थे। इस स्थिति पर चिंता जताते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आप जितनी देर तक सदन में बैठेंगे, उतना ही आपको वरिष्ठ विधायकों का मार्गदर्शन मिलेगा। उन्होंने सदस्यों को अपनी कार्यकुशलता बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि उन्हें सूचना तकनीक का अधिकतम उपयोग करना चाहिए।

 

तकनीक के इस्तेमाल से बढ़ेगी कामकाज में पारदर्शिता: अखिलेश

इस मौके पर नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने ई-विधान प्रणाली लागू करने के पहल की सराहना करते हुए कहा कि सरकार के कामकाज में जितनी तकनीक का इस्तेमाल बढ़ेगा, उतनी पारदर्शिता आएगी। इससे सरकार की जहां जवाबदेही बढ़ेगी, वहीं भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा। उन्होने सपा सरकार के समय शुरू किए गए डायल-100 के लाभ की चर्चा करते हुए कहा कि शुरूआत में इसकी विरोध हुआ था, लेकिन आज यह व्यवस्था देश की सबसे उपयोगी व्यवस्था बन चुकी है। अखिलेश ने कहा कि सपा सरकार के समय में विधानसभा की ई-लाइब्रेरी बनाई थी। आज हम एक कदम आगे बढ़ रहे हैं। टेक्नॉलजी से काम करने में आसानी होगी।

योगी पर तंज कसने वाले अखिलेश हुए हैरान
मुख्यमंत्री के कंप्यूटर ज्ञान पर अक्सर तंज कसने वाले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव उस समय अचंभित दिखे, जब ई-विधान प्रणाली का शुभारंभ हुआ। इस नई प्रणाली की खासियत सुनकर उन्होंने इस व्यवस्था की जमकर तारीफ की। साथ ही इसके लिए मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को विशेष तौर पर बधाई भी दी। अपनी बारी आने पर अखिलेश यादव ने कहा कि नई व्यवस्था देखकर उन्हें तो ऐसा लगा कि यह विधानसभा नहीं, बल्कि कोई आईटी सेंटर है। सभी विधायकों के सीट पर टैबलेट लगा देख अखिलेश ने कहा कि इसे देखकर अब तो ऐसा लगने लगा है कि यह कोई विधानसभा नहीं, बल्कि कोई बड़ा आईटी सेंटर हैं।

 
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ई-विधान प्रणाली लागू करने वाला यूपी पहला राज्य: महाना

इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने लोकसभा अध्यक्ष समेत सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ई-विधान प्रणाली लागू करने वाला यूपी देश का पहला का राज्य है। उन्होंने कहा कि मात्र डेढ़ महीने में विधानसभा को कागज रहित करने की व्यवस्था से संबंधित सभी प्रबंध किए गए हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के युग में यह आवश्यक है कि संवैधानिक संस्थाओं का आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण करने के लिए आगे बढ़ा जाये। क्योंकि इससे कार्य प्रणाली में एकरूपता, पारदर्शिता और तकनीकी दक्षता आती है।

देश के सभी विधान मंडलों में प्रधानमंत्री विजन ‘वन नेशन वन डिजिटल प्लेटफार्म पर नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) का निर्माण किया गया है, जो देश की विधान सभाओं को एक ही स्थान पर एक ही पोर्टल लाता है। इस एप्लीकेशन के माध्यम से सदन के सदस्यों को देश के सभी विधान मंडलों से संबंधित विभिन्न सूचनाएं, प्रक्रिया, अधिनियम, सदन की कार्य पद्धति, विधेयक, प्रश्नोत्तर प्रणाली, समिति प्रणाली की पूर्ण सूचना एक जगह पर प्राप्त हो सकेगी। इस मौके पर संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया गया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव विधान सभा प्रदीप कुमार दुबे और लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह समेत अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
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