प्रदेश के 19 जिलों में अपने आदेश को लागू कराने वाले मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के निदेशक तकनीकी हरीश बंसल तब बैक फुट पर आ गए, जब उन्होंने विद्युत नियामक आयोग के द्वारा उपभोक्ताओं को दी गई सुविधा को छीन लिया। हालाकि, जब उनको नियामक आयोग के आदेश के उल्लंघन का एहसास हुआ, तो उन्होंने बिजली उपभोक्ताओं की सुविधा को फिर से दिए जाने का संशोधित आदेश जारी कर दिया।
विद्युत नियामक आयोग ने बिजली उपभोक्ताओं को 15 फ़ीसदी सुपरविजन शुल्क जमा करके बिजली नेटवर्क बनाने की सुविधा का प्रावधान सप्लाई कोड में किया है। यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू है। इस व्यवस्था में फेरबदल का अधिकार सिर्फ आयोग को या फिर पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष को। लेकिन, हरीश बंसल ने नया आदेश जारी कर दिया कि सुपरविजन पर कोई भी बिजली नेटवर्क का एस्टीमेट न बनाया जाए जो सिर्फ प्रदेश के 19 जिलों पर प्रभावित किया गया था। इससे उन उद्यमियों में हड़कंप मच गया जो ट्रांसफॉर्मर, केबल तार सहित अन्य बिजली उपकरणों का प्रोडक्शन करते हैं। उनके प्रोडक्शन का सबसे ज्यादा खपत ठेकेदारों के द्वारा ही की जाती। उधर, अमर उजाला ने इस खबर का खुलासा किया तो शासन से लेकर पावर कार्पोरेशन प्रबंधन में संज्ञान लेकर आदेश को संशोधित कराया जिसका निदेशक ने 19 सितंबर को नया आदेश जारी करके अपनी गलती को सुधार लिया। हालांकि, इस आदेश के पीछे मंशा कुछ और थी,जो अधूरी रह गई