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बदनाम बिल्डर ने फिर दिया दर्द: कुसूर सिर्फ याजदान का ही नहीं, सिस्टम का भी है; पूरा ढांचा कमजोर...न ही नक्शा

Wed, 25 Jan 2023 12:38 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

राजधानी लखनऊ में मंगलवार शाम खौफनाक हादसे में वजीर हसन रोड स्थित एक पांच मंजिला अपार्टमेंट ताश के पत्तों की तरह ढह मलबे में तब्दील हो गई। पांच मंजिला इमारत में करीब 16 फ्लैट बने हुए थे। इन सभी में परिवार रह रहे थे। 
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Lucknow Building Collapse - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बदनाम बिल्डर याजदान ने एक बार फिर लखनऊ के लोगों को दर्द दिया। अब तो याजदान बिल्डर के मायने ही अवैध निर्माण हो चला है। ऐसा कहना अतिशयोक्ति भी नहीं होगा। असुरक्षित तरीकेसे बिल्डिंग बना फ्लैट बेच देने के अलावा सरकारी जमीनों पर कब्जे और अवैध निर्माण कर अपार्टमेंट खड़ा कर देने के लिए याजदान बिल्डर शहर में बदनाम रहा है। हाल ही जहां प्राग नरायन रोड पर एलडीए ने बिल्डर की एक अपार्टमेंट इसीलिए तोड़ी। वहीं, महानगर विस्तार में भी स्वीकृत नक्शे से अलग सात मंजिला इमारत बिल्डर ने खड़ी कर दी।
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याजदान ने अगर ईमानदारी से काम किया होता तो अलाया अपार्टमेंट में लोग मलबे में नहीं दबते। अलाया में लोग खोदाई और ड्रिलिंग की वजह लोग पूछते रहे, सबको अलग-अलग कारण बताया जाता रहा। झगड़ा भी हुआ पर बिल्डर नहीं माना। साफ है कि उसकी मंशा वहां कुछ और करने की थी और बीच में हादसा हो गया। 

कुसूर सिर्फ याजदान का ही नहीं, सिस्टम का भी है
 कुसूर सिर्फ याजदान का ही नहीं, सिस्टम का भी है। बिल्डर के अवैध निर्माण के लिए एलडीए के इंजीनियरों और अधिकारियों के अलावा पुलिस, अग्निशमन विभाग की भी सांठगांठ रही। यही वजह रही कि एक दशक में बिल्डर न केवल एक के बाद एक आवासीय इमारतें बनाता गया, अपनी सियासी पैठ भी मजबूत कर ली। 
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यही वजह रही कि अवैध निर्माण कर की कमाई से 2017 में विधानसभा चुनाव भी बसपा की टिकट से लड़ लिया। 

बिल्डर फहद याजदानी को हालांकि इस चुनाव में बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। सपा के बड़े नेता शाहिद मंजूर से भी उसके नजदीकी संबंध बताए जा रहे हैं। यह भी चर्चा है कि सबसे ऊ परी मंजिल पर बने पेंट हाउस को शाहिद मंजूर ने ही खरीदा था। इसे बाद में उन्होंने बेच दिया।

महानगर विस्तार में तो एलडीए के सांठगांठ से खड़ा कर दिया सात मंजिला अपार्टमेंट

एलडीए का रिकॉर्ड खुद बताता है कि उसका बिल्डर से सांठगांठ था। महानगर विस्तार में इसी सांठगांठ से बिल्डर ने सात मंजिला अपार्टमेंट का निर्माण किया है। यहां पांच मंजिल के बाद ही बिल्डिंग को सील कर दिया गया। इसके बाद भी दो मंजिल और बनाई गईं। लेकिन, इसके बाद एलडीए कोई कार्रवाई नहीं कर पाया। यह उस समय हुआ जबकि बिल्डिंग को तोड़ने का आदेश तक हुआ। हालांकि, प्राग नरायन रोड पर सरकारी नजूल की जमीन कब्जा करने के चक्कर में उसके छह मंजिला अपार्टमेंट को जरूर एलडीए ने तोड़ दिया।

 

पूरा ढांचा कमजोर...हादसे की बड़ी वजह

वजीर हसन रोड पर निर्माण करते समयढांचे की मजबूती का कोई ख्याल नहीं रखा गया। कमजोर ढांचे पर ही पूरी बिल्डिंग खड़ी की गई। खुद फ्लैट मालिकों ने बताया कि इसको लेकर कई बार सवाल उठाया, लेकिन बिल्डर ने एक न सुनी। फ्लैट खरीदने के बाद एक तरह से यहां फंस गए। पेंट हाउस का निर्माण तो डिजाइन में ही नहीं था। इसके बाद भी जबरन बनाया गया। कमजोर ढांचा खोदाई और ड्रिलिंग झेल नहीं पाया।

 

ऐसी मनमानी...न सैटबैक, न पहुंचने का रास्ता, खड़ा कर दिया पांच मंजिला अपार्टमेंट

लखनऊ के वजीर हसन रोड पर छह मीटर से भी कम के रास्ते पर अंदर की तरफ बने अलाया अपार्टमेंट का निर्माण करीब 4000 वर्गफीट जमीन पर किया गया है। पांच मंजिला इस इमारत को बनाने के समय न सैटबैक छोड़ा गया और न जरूरी संपर्क रास्ता। आलम बिल्डर ने इसकी भी फिक्र नहीं की कि आग लगने जैसा हादसा होने पर वहां तक अग्निशमन की गाड़ियां कैसे पहुंचेंगी।

 

एलडीए के एक अधिकारी ने बताया कि अभी तक बिल्डिंग का कोई नक्शा सामने नहीं आया है। हालांकि, इसकी जांच कराई जा रही है कि इस अवैध निर्माण के खिलाफ क्या पहले कोई कार्रवाई की गई, इसकी भी जांच कराई जा रही है। इसके बाद ही पूरी सच्चाई सामने आ पाएगी।


 
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कार्रवाई पर जांच शुरू

जोनल अधिकारी रामशंकर का कहना है कि इमारत कई साल पहले ही बन चुकी है। इसमें लोग रह भी रहे थे। वहीं, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने हादसे के लिए जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए कहा है।
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