उत्तर प्रदेश में सोमवार तक नई सीरीज का 500 रुपये का एक भी नोट नहीं पहुंचा। दूसरी ओर 100 रुपये के नोट भी खत्म होने को हैं। ऐसे में मंगलवार का दिन बैंकों व डाकघरों के लिए कड़ी परीक्षा वाला होगा। सबसे ज्यादा दिक्कत उन ग्राहकों को होगी जो 4500 के पुराने नोट के बदले नए नोट लेने पहुंचेंगे।
वहीं करेंसी चेस्ट्स द्वारा बैंकों को नोटों की सप्लाई भी 10-15 लाख रुपये तक सीमित है, इससे मांग की तुलना में सभी को पैसा उपलब्ध कराना संभव नहीं हो पा रहा है। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओसी) और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ऑफिसर्स एसोसिएशन (एसबीआईओए) व अन्य बैंक एसोसिएशंस के पदाधिकारियों ने सोमवार को राजधानी में यह जानकारी दी।
एआईबीओसी के पदाधिकारी पवन कुमार ने बताया कि बैंक कर्मचारियों से ग्राहक 2000 रुपये से कम मूल्य वर्ग के नोट मांग रहे हैं, क्योंकि मार्केट में 2000 रुपये का नोट चलाना आसान नहीं है। आरबीआई द्वारा यूपी में 500 के नए नोट न दिए जाने से हालात विकट हो गए हैं।
सरकार के नए फरमान के मुताबिक बैंक में साढ़े चार हजार रुपये के 500 और 1000 के पुराने नोट मंगलवार से बदले जाने हैं। ऐसे में बिना 500 के नए नोट के हजारों ग्राहकों की मांग पूरी कर पाना संभव नहीं हो पाएगा, क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में 100-100 के नोट जुटाना संभव नहीं है।
10.30 से 4.30 बजे तक ग्राहकों के लिए खुलेंगे बैंक
डेमो पिक
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ऑफिसर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी विनय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सरकार या आरबीआई ने बैंकों को सुबह आठ से रात आठ बजे तक खोले रखने के निर्देश नहीं दिए हैं। बैंक सुबह साढ़े 10 बजे से शाम साढ़े चार बजे तक ग्राहकों के लिए खुलेंगे। बैंककर्मी इसके बाद दिन भर में आए रुपयों, पहचान पत्रों और अन्य आंकड़ों को आरबीआई भेजने के लिए फीड करने का काम करेंगे, जिसमें काफी समय लगता है।
करेंसी चेस्ट से पैसा नहीं मिल रहा
ऑल इंडिया पंजाब नेशनल बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के महासचिव संजय काले ने बताया कि करेंसी चेस्ट से बैंकों को जरूरत के मुताबिक नकदी की सप्लाई नहीं हो रही है। अभी मिल रहे पैसे से बैंक अपनी शाखाओं में 15 लाख रुपये तक रोजाना ही भेज पा रहे हैं, जबकि जरूरत रोजाना 40 से 50 लाख भेजने की है।
पर्याप्त स्टाफ और संसाधन नहीं
एसोसिएशन के पदाधिकारी दिलीप चौहान ने कहा कि स्टाफ और संसाधन नहीं होने से हालात मुश्किल बने हुए हैं। नकदी लाने-ले जाने के लिए बैंकों के पास
पर्याप्त कैश ट्रांसपोर्ट वाहन नहीं हैं, न ही हथियारबंद गार्ड हैं। बैंक कर्मचारी अवकाश के दिनों में भी 16 से 18 घंटे काम कर रहे हैं। इसके बावजूद ज्यादातर समय वे ग्राहकों का गुस्सा झेल रहे हैं।