मटियारी निवासी रेनू सिंह के पति रघुवंश गुजरात में काम करते हैं। उनका लॉकर संख्या 74 था। सोमवार सुबह बैंक पहुंची रेनू ने बताया कि रविवार रात में बैंक का लॉकर टूटने की सूचना मिलने पर तत्काल वह पहुंची थी। पर उन्हें सही जानकारी नहीं मिल पाई थी। सोमवार सुबह जब वह बैंक पहुंची तब उन्हें लॉकर के टूटे होने की सूचना मिली। उन्होंने कहा कि अगर वह जेवर लॉकर में न रखतीं तो आज पछतावा न होता।
तीन पीढि़यों के जेवर कुछ घंटे में चले गए
चिनहट की गीता सिंह का लॉकर संख्या 72 है। उनके पति सुरेश सिंह अधिशाषी अभियंता के पद से रिटायर्ड हैं। बैंक से रोते बिलखते निकलीं गीता ने कहा कि उनकी शादी के समय सास ने जेवर दिए थे जो लॉकर में रखे थे। बेटी और बहू के भी जेवर थे। पति ने अपने फंड से भी जेवर बनवाए थे। तीन पीढि़यों के जेवर कुछ घंटे में चोरी हो गए।
दस लाख रुपये और जेवर समेट ले गए चोर
लखनऊ सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण कुशवाहा की पत्नी ऊषा का बैंक में लॉकर संख्या 65 था। उन्होंने बताया कि 13 साल पहले 2400 रुपये प्रतिवर्ष किराये पर लॉकर लिया था। लॉकर में 11 लाख रुपये, 400 ग्राम सोना और करीब 800 ग्राम चांदी के जेवर रखे थे।
लॉकर टूटा देखकर महिला और वृद्धा हुईं बेहोश
चिनहट की रहने वालीं शशि कला का लॉकर लॉकर संख्या 48 था। सूचना मिलते ही वह दौड़े-दौड़े बेटी के साथ बैंक पहुंची। लॉकर टूटा देख वह गश खाकर गिर पड़ीं। बेटी ने उनके चेहरे पर पानी डाला तब उन्हें होश आया। थोड़ा संभलने पर वह रोते बिलखते बाहर आईं और सिर पर हाथ रखकर कुछ देर तक सड़क पर ही बैठी रहीं। इसी तरह लॉकर टूटा देखकर वृद्धा भारती की हालत बिगड़ गई। वह अपने बेटे के साथ आई थीं।
ग्राहकों के सामने आएगी यह दिक्कत
लॉकर से चोरी हुए सामान बरामद होने के बाद उसके असली मालिक की पहचान पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती हो गई। जेसीपी एलओ ने बताया कि लॉकर में रखे हुए सामान की कोई रिकॉर्ड बैंक के पास नहीं होता है। लॉकर में क्या सामान है यह गोपनीय होता है और सिर्फ लॉकर मालिक को ही पता होता है। अब ऐसे में सवाल उठता है कि जिन लोगों का लॉकर टूटा और सामान चोरी हुआ, वह कितने का माल बताते हैं। वहीं बरामद मॉल का असली मालिक कौन है, यह भी लॉकर मालिक को साबित करना होगा। तभी मॉल उसको मिल सकेगा। जेसीपी ने खुद स्वीकार किया है कि माल बरामदगी और असली मालिक की पहचान दोनों ही काम बहुत मुश्किल है।