छानबीन में सामने आया है कि इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में ड्यूटी के दौरान परवेज ने शुरू के कुछ वर्ष लगातार नाइट ड्यूटी की। उसके ड्यूटी चार्ट से एटीएस को यह जानकारी मिली है। माना जा रहा है कि वह दिन में संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त रहता था। परवेज के घर से मिले मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क को डिकोड करने के लिए एटीएस केंद्रीय एजेंसियों से भी सहयोग ले रही है। परवेज ने जुलाई 2021 में इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में बतौर रेजिडेंट डॉक्टर जॉइन किया था। इस दौरान एक वर्ष में ज्यादातर रात की शिफ्ट में ही काम किया था। पता लगाया जा रहा है कि यह एक संयोग था या साजिश।
जांच एजेंसियों की पड़ताल में सामने आया है कि परवेज तीन वर्ष तक मालदीव में रहा। एजेंसियों को संदेह है कि इसी दौरान वह कट्टरपंथियों के संपर्क में आया। एटीएस परवेज के मालदीव दौरे और वहां उसके करीबियों का पता लगा रही है। जानकारी जुटाई जा रही है कि परवेज के विदेशी दौरे का कारण क्या था?
जांच एजेंसियों का कहना है कि दुबई से मनोचिकित्सक डॉ. मुजफ्फर राथर पूरे माड्यूल को संचालित कर रहा था। वह सहारनपुर से गिरफ्तार डॉ. आदिल का बड़ा भाई है, जो पांच वर्ष से दुबई में है। डॉ. मुजफ्फर को यूपी में सक्रिय स्लीपर सेल का मुखिया माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि मुजफ्फर के कहने पर ही डॉक्टरों का गिरोह सक्रिय किया गया। जम्मू कश्मीर पुलिस ने उसके खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी किया है।