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यूपी के इस शहर की हवा में घुल गया है जहर, पढ़िए खबर...

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दिल्ली में प्रदूषण का स्तर तय मानकों से 11 गुना ज्यादा हुआ तो वहां 1 जनवरी से रोजाना निजी वाहन चलाने पर रोक लगा दी गई। पर, यह केवल दिल्ली की बात नहीं, लखनऊ में भी हवा जहरीली होती जा रही है। पिछले पांच साल में प्रदूषण का स्तर डेढ़ गुना तक बढ़ चुका है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़े बताते हैं कि यहां हवा में मानकों से सात गुना ज्यादा प्रदूषण है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक मानक 50 माइक्रोन प्रति घन मीटर होना चाहिए, लेकिन लखनऊ का स्तर 349.8 माइक्रोन प्रति घन मीटर है।

नेशनल एयर एंबिएंट क्वालिटी स्टैंडर्ड (नैक्स) के मानक से भी यह 3-4 गुना ज्यादा है। इसकी वजह भी वही है। वाहनों की बढ़ती संख्या। हर साल एक लाख नए वाहन लखनऊ के ट्रैफिक का हिस्सा बन जाते हैं।
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ऐसे में जल्द ही दिल्ली की तरह लखनऊ को भी सड़कों से वाहनों को कम करने के लिए कड़े फैसले लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस के आंकड़ों के मुताबिक, 2010 में लखनऊ में 11,07,455 वाहन सड़कों पर थे। जबकि 2015 में पहुंचते ही यह संख्या 17,09,662 हो गई। पांच सालों में लखनऊ की सड़कों पर 6,62,207 वाहन बढ़ गए यानी 54% की बढ़ोतरी हुई।

वाहनों की तेजी से बढ़ी इस संख्या का असर पिछले सालों के प्रदूषण के आंकड़ों पर भी दिखता है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च की रिपोर्ट बताती है कि सांस के साथ घुलनशील कण (पीएम-10) का स्तर भी करीब डेढ़ गुना इन पांच साल में बढ़ चुका है। इसका सीधा असर आम-आदमी और पर्यावरण दोनों की सेहत पर देखने को मिल रहा है।
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सांस हमें लेनी है कदम भी तो हमें ही बढ़ाने होंगे

•कार पूल कर ऑफिस या स्कूल जाएं
•एक दिन बिना कार के यात्रा करें
•परिवार के सदस्य अलग-अलग कार का उपयोग न करें
•गाड़ी की सर्विसिंग समय पर कराएं, इससे फ्यूल की खपत और प्रदूषण दोनों कम होंगे
•हरियाली को बढ़ाने में मददगार बनें

तपती भट्ठी जैसा बना रहे हैं हम शहर को

प्रदूषण बढ़ रहा है। इसके लिए नीति बनाकर या कानून थोपकर कुछ नहीं हो सकता। लोगों को जागरूक करना होगा। इससे ही हम लोगों को निजी वाहन के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए जागरूक कर पाएंगे।

एक लाख वाहन हर साल सड़क पर बढ़ने का मतलब है कि हम शहर को एक तपती भट्ठी बनाने की ओर हैं। दिल्ली या दूसरे शहरों में जो हालात बने हैं। वैसे आने वाले सालों में लखनऊ में भी देखने को मिल जाएंगे।
कुलदीप मिश्र, क्षेत्रीय अधिकारी, यूपीपीसीबी

प्रदूषण कैसे हो कंट्रोल, कोई मानक ही नहीं देश में

लखनऊ में हर साल तेजी से वाहन बढ़ रहे हैं। हर साल करीब 8-9 प्रतिशत की बढ़ोतरी वाहनों की संख्या में दिखती है। इस साल तो यह तेजी 10 प्रतिशत से ज्यादा थी। इस तेजी से बढ़ते वाहन हवा में सूक्ष्म कण छोड़ते हैं। पीएम-10 के बाद अब हम इससे भी छोटे कणों की निगरानी कर रहे हैं। बुरी खबर यह है कि ऐसे कणों के लिए कोई मानक देश में नहीं है। इससे नुकसान का आकलन नहीं हो पाता।
डॉ. एससी बर्मन, प्रमुख, एनवायरमेंटल मॉनिटरिंग डिवीजन, आईआईटीआर

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