लखनऊ के बाजारखाला इलाके में बीएससी फाइनल ईयर के छात्र गौरव वर्मा ने भविष्य की चिंता और तनाव के चलते घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परीक्षा देकर लौटने के बाद हुई इस घटना से परिवार में कोहराम मच गया, पुलिस ने मोबाइल कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
भविष्य को लेकर परेशान बीएससी फाइनल ईयर के छात्र बाजारखाला पुराना टिकैतगंज निवासी गौरव वर्मा (22) ने सोमवार दोपहर घर में फंदा लगाकर जान दे दी। वह सुबह कॉलेज परीक्षा देने भी गया था। लौट कर आकर उसने आत्महत्या की। पुलिस का कहना है कि गौरव तनाव में रहता था।
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मूल रूप से नगराम के केवली गांव निवासी गौरव वर्मा मां दीप्ति के साथ किराये के मकान में रहता था। वह वजीरगंज स्थित क्रिश्चियन कॉलेज से बीएससी फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रहा था। मां एक प्राइवेट फैक्टरी में नौकरी करती हैं और गौरव भी पढ़ाई के साथ ट्यूशन भी पढ़ाते थे।
पिता वेद प्रकाश गांव में रहते हैं। उनके रिश्ते के भाई अलोक वर्मा ने बताया कि गौरव सोमवार सुबह कॉलेज परीक्षा देने के लिए गए हुए थे। चाची दीप्ति ड्यूटी पर गई हुई थी। दोपहर 12 बजे गौरव कॉलेज से लौटा और चुपचाप कमरे में चले गया।
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थोड़ी देर बाद मकान में रह रहे दूसरे किरायेदार को गौरव से कुछ काम था, तो गौरव के कमरे पहुंचे और दरवाजा खटखटाया। अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। किरायेदार ने खिड़की से झांक कर देखा तो गौरव को कुंडे में दुपट्टे के सहारे लटका पाया। उसने मकान मालिक व दीप्ति को सूचना दी।
इंस्पेक्टर बाजारखाला बृजेश सिंह ने बताया कि परिजनों ने कोई आरोप नहीं लगाया है। जांच में इस बात का पता चला है कि गौरव तनाव में रहता था। पुलिस ने उसके मोबाइल फोन को जांच के लिए कब्जे में ले लिया है।
इकलौते बेटे का शव देख बेसुध हुई मां
गौरव की मां दीप्ति को जब इकलौते बेटे की मौत की खबर मिली तो वह रोते-पीटते हुए घर पहुंची। बेटे का शव लटका देख वह बेसुध सी हो गई। खबर पाकर केवली गांव से परिजन भी मौके पर पहुंच गए।
मोहल्ले की महिलाओं व रिश्तेदारों ने उनको संभाला। दीप्ति बार-बार लोगों से यही कह रही थीं कि वह बेटे के बड़ा अफसर बनाना चाहती थी। इसी के लिए वह गांव से दूर किराये के मकान में रह रही थीं। रोते हुए दीप्ति ने बताया कि बेटे ने कभी किसी दिक्कत की जिक्र उनसे नहीं किया। अचानक जान देना का फैसल कर लिया। अगर बेटा उनको कुछ बताता तो वह उसके लिए कुछ भी कर सकती थी।