लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रवेश विभाग में दाखिलों की मनमानी अपने चरम पर है। यह आरोप है विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं ने लगाया है। ताजा मामला विवि में चल पीएचडी प्रवेश परीक्षा से जुड़ा हुआ है। यहां आंसर-की जारी किए बगैर ही साक्षात्कार में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की सूची जारी कर दी गई है। इसे लेकर समाजवादी छात्रसभा कार्यकर्ताओं ने सोमवार को प्रशासनिक भवन का घेराव किया।
लविवि में 7 और 8 दिसंबर को 40 से अधिक विषयों के लिए पीएचडी की करीब एक हजार सीटों पर दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा हुई थी। इसमें सहयुक्त महाविद्यालयों की सीटें भी शामिल थीं। प्रवेश परीक्षा में करीब पांच हजार अभ्यर्थियों के शामिल होने की बात कही गई थी। ऐसे में सीटों के सापेक्ष महज कुछ प्रतिशत अभ्यर्थियों को ही साक्षात्कार के लिए बुलाए जाने पर एडमिशन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसे लेकर समाजवादी छात्रसभा कार्यकर्ताओं ने सोमवार को प्रशासनिक भवन का घेराव कर प्रदर्शन किया।
उन्होंने प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए सभी अभ्यर्थियों की अंक तालिका और आंसर-की जारी किए करने की मांग की। प्रदर्शन की सूचना पाकर मौके पर पहुंचे अपर कुलानुशासक प्रो. ओपी शुक्ला, डीन एडमिशन प्रो. पंकज माथुर और प्रवेश समन्वयक डॉ. अनित्य गौरव ने नाराज छात्रों से बात की। इस पर छात्रों ने उन्हें मांग पत्र दिया।
छात्रों ने चेतावनी दी कि अगर दो दिन में मांग न मानी गई, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। इस पर प्रवेश समन्वयक की ओर से जल्द ही आंसर-की जारी किए जाने का आश्वासन दिया गया है। इकाई अध्यक्ष प्रिंस कुमार यादव, महासचिव रजत अग्रहरि, शिवाजी यादव, रोहित कुमार, विशाल पटेल, अश्विन तिवारी, अर्चित पांडेय, नीरज, अमन, राघव, रिशु, आदित्य, उत्कर्ष क्षितिज आदि मौजूद रहे।
इस बार भी नहीं जारी हुई बुकलेट
एनएसयूआई के कार्यकर्ता प्रिंस प्रकाश और विशाल सिंह ने बताया कि विवि प्रशासन हर बार पीएचडी प्रवेश परीक्षा में शामिल छात्रों से बुकलेट वापस ले लेता है जो पूरी तरह से गलत है। इसके लिए संगठन ने कई बार ज्ञापन दिया है लेकिन मांग नहीं मानी गई। इस बार भी विवि ने यही किया। इसके लिए संगठन जल्द ही धरना प्रदर्शन करेगा।
यूजी-पीजी एडमिशन में भी हुआ था विवाद
लविवि ने स्नातक और परास्नातक की प्रवेश प्रक्रिया के दौरान भी छात्रों को दाखिले लिए सिर्फ आवंटन पत्र जारी किया था। इसमें भी कोई अंतिम सूची या कटऑफ नहीं जारी किए जाने से छात्र-छात्राओं ने नाराजगी जताई थी। उसमें भी एडमिशन प्रक्रिया में धांधली के आरोप लगे थे।