लखनऊ। रसोई गैस की किल्लत के कारण लोग फिर पारंपरिक सौर ऊर्जा की ओर रुख कर रहे हैं। एक दशक पहले बंद हो चुकी उत्तर प्रदेशनवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (नेडा) की सोलर कुकर सब्सिडी योजना फिर से चर्चा में है।
करीब 10-12 वर्ष पहले नेडा सोलर कुकर पर भारी सब्सिडी देता था। प्रचार-प्रसार की कमी और खाना बनाने में अधिक समय लगने से यह योजना धीरे-धीरे बंद हो गई। मुरादाबाद के सोलर कुकर निर्माता नीरज गर्ग बताते हैं कि पहले खाना बनने में डेढ़ घंटा लगता था, जिसे अब बॉक्स डिजाइन और रिफ्लेक्टर में सुधार कर 60 मिनट तक सीमित कर दिया गया है।
उन्होंने बताया िक गुजरात और महाराष्ट्र में इसकी भारी मांग है। नीरज के मुताबिक, इन दिनों रोजाना करीब 50 लोग फोन कर सोलर कुकर की जानकारी ले रहे हैं। जिला नेडा अधिकारी टीकाराम ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में सोलर कुकर पर कोई सरकारी सब्सिडी नहीं है। सेवानिवृत्त परियोजना अधिकारी मो. जावेद का कहना है कि सीमित बजट और धीमी कुकिंग प्रक्रिया के कारण योजना बंद कर दी गई थी। अब बदलती परिस्थितियों में इसकी प्रासंगिकता फिर बढ़ गई है।