पूर्वोत्तर रेलवे यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहा है। रेलवे बोर्ड ने छह सितंबर से ट्रेनों की पैंट्रीकार से एलपीजी हटाने का निर्देश दिया था, लेकिन पूर्वोत्तर रेलवे के अफसरों को इसकी परवाह नहीं है। अब तक ट्रेनों से एलपीजी नहीं हट सकी है। हालत यह है कि पुष्पक, गोरखपुर एलटीटी, राप्तीसागर जैसी ट्रेनों में भी धड़ल्ले से एलपीजी पर खाना पक रहा है।
इससे हादसे की आशंका बनी हुई है। रेलवे बोर्ड के निदेशक (टी एंड सी) फिलिप वर्गीस ने बताया कि उच्चस्तरीय सेफ्टी रिव्यू कमेटी ने यह तय किया था कि ट्रेनों की पैंट्रीकार में एलपीजी के इस्तेमाल को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया जाए। इस बाबत उत्तर, पूर्वोत्तर सहित सभी रेलवे जोनों को एलपीजी हटाने के निर्देश दे दिए गए थे। साथ ही यह भी कहा गया कि एलपीजी पर खाना पकाते हुए पाए जाने पर ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। छह सितंबर तक की मोहलत भी दी गई थी।
एलपीजी की जगह लगाए जाने थे इंडक्शन व हॉट ब्वॉयलर
एलपीजी की जगह इंडक्शन व हॉट ब्वॉयलर लगाए जाने थे। इस मियाद में उत्तर रेलवे ने काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस से एलपीजी हटवाई, लेकिन पूर्वोत्तर रेलवे की ट्रेनों में आदेशों को अनसुना कर दिया। यही वजह है कि पुष्पक एक्सप्रेस, गोरखपुर-एलटीटी, राप्तीसागर, अमरनाथ एक्सप्रेस, गोरखपुर-यशवंतपुर की पैंट्रीकार में एलपीजी पर ही खाना पक रहा है। इतना ही नहीं आईआरसीटीसी भी रेलवे को लगातार चिट्ठियां लिख रही है। वहीं अफसरों की दलील है कि नई एचएचबी बोगियां लगने पर ही पैंट्रीकार में एलपीजी हट सकेगी। नई बोगियों के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं, यह बताने को वह तैयार नहीं।
हादसे से निपटने के इंतजाम अधूरे
बोर्ड के मुताबिक पैंट्रीकार में अग्निशमन यंत्र, सेफ्टी सर्टिफिकेट, फर्स्ट एड बॉक्स, फायर अलार्म, आईएसआई सर्टिफाईड किचन उपकरण होने अनिवार्य हैं, लेकिन असलियत इससे इतर है। पैंट्रीकार की जांच के दौरान भयंकर अनियमितताएं सामने आती रही हैं। मसलन, कहीं भी मानक पूरे नहीं मिलते। गंदगी के बीच खाना पकता है। वेंटिलेशन तक का इंतजाम नहीं होता और दुर्घटना से निपटने के लिए बंदोबस्त नहीं होते हैं।
मॉडर्न कोच फैक्टरी बना रही एसी पैंट्रीकार
पैंट्रीकार में होने वाले हादसों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से रेलवे बोर्ड के निर्देश पर रायबरेली स्थित मॉडर्न कोच फैक्टरी (एमसीएफ) ने अत्याधुनिक एसी पैंट्रीकार बनाई है। इसमें इंडक्शन कुकिंग स्टोव के साथ-साथ हॉट ब्वॉयलर लगा हुआ है। इसमें वाटर प्यूरीफायर, स्टोर रूम, फायर डिटेक्शन, चिमनी भी है। इतना ही नहीं इस पैंट्रीकार में स्टाफ के लिए 15 बर्थ भी हैं। 31 मार्च तक 17ऐसी पैंट्रीकार बनाने का लक्ष्य एमसीएफ को दिया गया था, लेकिन परंपरागत बोगियों में इन्हें लगाया नहीं जा सकता है।
इन ट्रेनों की पैंट्रीकार में लग चुकी है आग
- 5 मार्च, 2019 को यशवंतपुर-टाटानगर एक्सप्रेस में
- 29 अगस्त, 2019 को तेलंगाना एक्सप्रेस में
- 16 दिसंबर, 2016 को बागमती एक्सप्रेस में
- 26 अक्टूबर, 2016 को विक्रमशिला एक्सप्रेस में
- 15 अक्टूबर, 2013 डिब्रूगढ़-नई दिल्ली एक्सप्रेस में
- 2011 में दिल्ली-मुंबई राजधानी एक्सप्रेस की पैंट्री में
आड़े आ रहे परंपरागत कोच
पूर्वोत्तर रेलवे, सीपीआरओ, पंकज कुमार सिंह ने बताया कि ट्रेनों की पैंट्रीकार से एलपीजी हटाने में परंपरागत कोच आड़े आ रहे हैं। एलएचबी की जो पैंट्रीकार हैं, उन्हें परंपरागत कोच में नहीं लगा सकते। कपलिंग में दिक्कत होती है। इसलिए जैसे-जैसे ट्रेनों के रैक बदल रहे हैं, पैंट्रीकार भी नई हो रही हैं। हालांकि, कुछ ट्रेनों में अभी एलपीजी हटवाई गई है और उसकी जगह हॉट ब्वॉयलर लगाए गए हैं।