केस एक: इंदिरानगर के राहुल सक्सेना सोमवार को जेट लाइट के विमान से लखनऊ से दिल्ली जा रहे थे।
जिस एजेंट से उन्होंने अपना टिकट बनवाया था, वहां से राहुल के मोबाइल फोन पर टिकट का विवरण आ गया।
ट्रेनों की तरह विमान में मोबाइल के मैसेज दिखाकर यात्रा करने का नियम नहीं है।
लिहाजा उन्होंने एयरपोर्ट पहुंचकर विमान कंपनी के बोर्डिंग काउंटर पर मैसेज दिखाकर टिकट का प्रिंट मांगा। एक पेज का प्रिंट देकर राहुल से 100 रुपये वसूल लिए गए।
केस दो: आलमबाग की शुभांगी खुराना ने भी अपने एजेंट से मुंबई का लो फेयर का टिकट जेट कनेक्ट में बुक कराया था। मोबाइल फोन पर मैसेज आते ही वह भी सीधे एयरपोर्ट पहुंच गईं।
यहां बोर्डिंग काउंटर पर बैठे कर्मचारी से जब उन्होंने टिकट का प्रिंट मांगा तो उन्हें प्रिंट दे दिया गया, लेकिन बिना कोई रसीद दिए ही 100 रुपये पैसेंजर सर्विस फीस के नाम पर चार्ज कर दिया। शुभांगी ने इसकी शिकायत एयरपोर्ट प्रशासन से की पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
ये दो मामले तो सिर्फ बानगी भर हैं। लो फेयर वाली कुछ विमान कंपनियां यात्रियों को टिकट का एक प्रिंट देने के लिए सौ रुपये तक वसूल रही हैं।
महानिदेशालय नागरिक उड्डयन (डीजीसीए) के कड़े निर्देशों के बावजूद इस मनमानी पर कोई अंकुश नहीं लग पा रहा है। डीजीसीए ने घरेलू उड़ान सेवाओं को दो श्रेणियों में बांट रखा है।
पहली श्रेणी में एयर इंडिया सहित कई फुल फेयर वाले विमान हैं। फुल फेयर वाली विमान कंपनियां यात्रियों को खाना मुहैया कराती हैं, जबकि दूसरी श्रेणी में लो फेयर वाली विमान कंपनियां हैं।
इनमें टिकट सस्ता होने के कारण यात्रियों को खाना नहीं दिया जाता है। लो फेयर वाली विमान कंपनियों ने अब अपनी आय बढ़ाने के लिए टिकट का प्रिंट देने के नाम पर 100 रुपये की वसूली भी शुरू कर दी है।
रोजाना करीब 15 सौ यात्री लो फेयर टिकट वाले विमानों से दिल्ली, मुंबई, बंगलुरू और पटना जाते हैं। इनमें जेट लाइट और जेट कनेक्ट ने दो दिन पहले यात्रियों को टिकट का प्रिंट देने का चार्ज 100 रुपये कर दिया है।
जेट एयर के टर्मिनल मैनेजर अमित ने इसे उचित बताया है। वहीं, एयरपोर्ट के निदेशक सुरेश चंद्र होता का कहना है कि विमान कंपनियां जो कुछ भी यात्रियों पर चार्ज करती हैं, उसका नियंत्रण डीजीसीए करता है।