सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि लोगों को ध्वनि प्रदूषण रोकने में बराबर का हिस्सेदार बनना चाहिए हमारी कोशिश भी है कि हम उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित करें। रात दस बजे के बाद शोर सुनाई दिया तो साज-ओ-सामान जब्त करने के साथ ही संचालक के खिलाफ धारा 188 के तहत निषेधाज्ञा उल्लंघन का मामला भी दर्ज होगा।
सिटी मजिस्ट्रेट ने साफ किया कि पर्यावरण अधिनियम के तहत ध्वनि प्रदूषण फैलाने के दोषी के खिलाफ पुलिस में सीधे एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती। पुलिस व प्रशासनिक टीम ऐसे आरोपियों के खिलाफ संबंधित एसीजेएम कोर्ट में बस वाद दाखिल कर सकती है। सजा का प्रावधान कोर्ट स्तर पर मामले की सुनवाई के बाद होगा।