इंडो-नेपाल की श्रावस्ती में खुली 62 किलोमीटर की सीमा व यहां लगने वाले साप्ताहिक बाजार आईएसआईएस की घुसपैठ का सबब बन सकते हैं। वहीं, पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों के पंजीयन व निगरानी के नाकाफी इंतजाम भी खतरे की संभावना को बढ़ा रहे हैं।
भारत-नेपाल के बीच नोमेंस लैंड पर लगे चंद पत्थर ही भूभाग को अलग दर्शाने का जरिया हैं। दोनों ओर से आने जाने के लिए खेत खलिहान का रास्ता यहां तक कि कुछ गांव भी हैं जो नोमेंस लैंड पर ही बसे हैं।
ककरदरी, भरथा रोशनगढ़ आदि गांवों की आबादी दोनों तरफ चौबीसों घंटे आती-जाती है। जहां देखने पर यह पता नहीं चलता कि कौन सा हिस्सा नेपाल में है और कौन सा हिस्सा भारत में।