हक के साथ बात जब अस्मिता की हो तो अवध की महिलाओं की शक्ति दिखती है। एका भी नजर आती है। लोकतंत्र में यही शक्ति जब धरातल पर उतरती है तो वर्जनाएं टूटती हैं। पुराने समीकरण भी ध्वस्त होते हैं। नए अध्याय की शुरुआत होती है और फिर सफर सफलता के शीर्ष तक पहुंचता है। 2019 के चुनाव में कुछ ऐसा ही दिखा। अवध की जिस सीट पर महिला प्रत्याशी उतरीं वहां महिलाओं का मतदान प्रतिशत अधिक रहा। ऐसे में महिला प्रत्याशियों को जीत भी मिली।
अवध की चर्चित महिला नेताओं को जीत दिलाने में सोच, समीकरण और हालात के साथ ही महिला मतदाताओं का मूड भी अहम साबित हुआ। बात चाहे 2019 में रायबरेली से सोनिया गांधी की हो या फिर अमेठी से स्मृति इरानी की। सुल्तानपुर से मेनका गांधी भी। ये तीनों जब मैदान में उतरीं तो इन्हें जिताने के लिए महिला मतदाताओं ने भी मोर्चा संभाल लिया। पुरुषों से आगे निकल मतदान केंद्रों पर पहुंचीं और वोटिंग में सर्वाधिक हिस्सेदारी निभाईं। जीत के रूप में बदलाव का सुखद संदेश भी मिला। इस बार के चुनाव में भी महिलाओं का मत निर्णायक साबित हो सकता है। इसमें युवाओं की सोच व सजगता भी निर्भर करेगी।
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प्रदेश में सर्वाधिक महिला मतदान प्रतिशत की बात करें तो 2019 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम के तीन जिले शीर्ष पर रहे। पहला स्थान अमरोहा का रहा। यहां की 71.55 प्रतिशत महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। 69.92 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर सहारनपुर की महिलाएं रहीं। तीसरा स्थान 68.14 मत प्रतिशत के साथ मुजफ्फरनगर की महिलाओं का रहा।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की यह कहानी जागरूकता और समीकरण की साध है। लेकिन अवध की बात तो एकदम निराली है। यहां की जिन सीटों पर मजबूत महिला प्रत्याशी उतरीं तो उन्हें जिताने के लिए महिला मतदाता भी घर की देहरी लांघ वोट की चोट करने बूथ पर पहुंच गईं।
सोनिया गांधी : रायबरेली में बरसे थे महिलाओं के वोट
रायबरेली से कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी जब मैदान में उतरीं तो मतदान में महिलाओं की भागीदारी भी खूब हुई। 54.33 प्रतिशत पुरुष मतदान प्रतिशत के सापेक्ष लोकतंत्र के महापर्व में महिलाओं की भागीदारी 58.12 प्रतिशत रही और चुनाव सोनिया गांधी बड़े अंतर से जीतीं भी।
- कुछ यही हाल अमेठी का भी रहा। तब देश के इस चर्चित मुकाबले में राहुल गांधी के सामने दूसरी बार भाजपा की स्मृति इरानी मैदान में थीं। जीत के लिए दोनों दलों ने पूरा जोर लगाया। कांग्रेस के लिए यह सीट सम्मान से जुड़ी तो भाजपा भी जीत से कम पर तैयार नहीं थी। आखिर स्मृति ने राहुल को हरा सुर्खियां बटोरीं। इसमें पार्टी कार्यकर्ताओं और मोदी लहर के साथ ही सबसे बड़ा योगदान महिला मतदाताओं का ही रहा। उन्होंने पुरुषों को पीछे छोड़ते हुए 56.37 प्रतिशत मतदान कर अमेठी के राजनीतिक अध्याय से गांधी परिवार को पांच साल के लिए दूर कर दिया।
मेनका गांधी: 59 प्रतिशत मतदान से जीत का संदेश
सुल्तानपुर से मेनका गांधी के उतरने से रोमांचक हुए मुकाबले में बसपा के चन्द्र भद्र सिंह को हार का सामना पड़ा। राजनीतिक कयासबाजी और समीकरण को सिद्ध करने के माहिर भी महिला मतदाताओं का मूड नहीं भांप पाए। मेनका की मार्मिक अपील पर महिलाएं ऐसी बहीं कि सर्वाधिक 59.09 प्रतिशत मतदान कर दिया। पुरुष 53.72 प्रतिशत के साथ यहां भी पीछे ही रह ताकते रहे और मेनका जिले की पहली महिला सांसद चुन ली गईं।