काशी में मोदी को हराने के लिए कोशिशें जारी हैं। मुख्तार अंसारी के मैदान छोड़ने के बावजूद सियासी दल एक अदद मुस्लिम चेहरे की फिराक में लगे हुए हैं।
इसी रणनीति के तहत लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने वाराणसी में नरेंद्र मोदी के खिलाफ जाकिया जाफरी को चुनाव लड़ाने की पहल की है।
उन्होंने जाकिया को मोदी के खिलाफ सर्वसम्मत उम्मीदवार बनाने के लिए गैर भाजपा दलों से समर्थन मांगा है।
मोदी के खिलाफ जारी है जाकिया की लड़ाई
जाकिया जाफरी 2002 के बाद से ही मोदी की खिलाफत करती रही हैं और मोदी के राज में हुए दंगे की विभीषिका सुनाती आई हैं।
प्रेस कांफ्रेंस में सुनील ने खुद ही बताया कि जाकिया जाफरी ने मोदी के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया था।
वर्ष 2002 के गुजरात दंगों में उनके पति व कांग्रेस सांसद अहसान जाफरी को उनके ही घर में जलाकर मार डालने का आरोप लगाया गया था।
इतना ही नहीं, जाकिया ने बीते मार्च महीने में एक बार फिर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। जाकिया ने नरेंद्र मोदी व 59 अन्य आरोपियों को क्लीन चिट देने वाले फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी।
सोनिया, मुलायम को लिखा खत
विभिन्न अदालतों में सुनवाई सुनील सिंह ने बताया कि तमाम कोशिशों के बावजूद जाकिया को इंसाफ नहीं मिल सका।
उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, सपा मुखिया मुलायम सिंह और बसपा सुप्रीमो मायावती को उन्होंने पत्र भेजकर जाकिया की उम्मीदवारी के लिए समर्थन देने का आग्रह किया है।
उनका मकसद सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ वास्तविक संघर्ष की शुरुआत करना है। सुनील सिंह के मुताबिक, लोकदल इन चुनावों में सांप्रदायिक ताकतों के विरुद्ध सशक्त राजनीतिक विकल्प के रुप में खुद को प्रस्तुत करेगी।
हालांकि, सवाल यह भी उठ रहा है कि यह महज वोटबैंक की राजनीति के तहत उठाया गया कदम है या फिर वाकई सियासी मैदान में उतरकर जाकिया जाफरी मोदी को हराना चाहती हैं।
तो, बिगड़ जाएगी मुस्लिम सियासत
लोकदल भले ही जाकिया को मोदी के खिलाफ उतारकर सियासी फायदा उठाने की फिराक में हो, पर उनकी चिट्ठी असरदार साबित होती नहीं दिख रही है।
जानकारों का मानना है कि कांग्रेस की जुगत से ही डॉन मुख्तार अंसारी ने मैदान छोड़ा है, जिसका मकसद सिर्फ एक था। मुस्लिम वोटों का बंटवारा न हो पाए।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर जाकिया मैदान में उतरती हैं तो फिर वही बिसात तैयार हो जाएगी। मुस्लिम वोट टूटेगा और फायदा मोदी को ही मिल जाएगा।
ऐसे में लोकदल की गुजारिश कितनी असरदार साबित होगी, इस पर संशय बना हुआ है।