लोकबंधु अस्पताल में लगी आग(फाइल फोटो)
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लोकबंधु अस्पताल में आग लगने की सूचना मिलते ही सीएफओ मंगेश कुमार, एफएसओ आलमबाग धर्मपाल सिंह व अन्य फायर अफसर आठ गाड़ियों के साथ मौके पर पहुंच गए थे। एफएसओ आलमबाग ने देखा कि कुछ लोग अस्पताल की दूसरी मंजिल पर मदद के लिए चीख पुकार मचा रहे थे। वह आग से बचने के लिए कूदने को तैयार थे।
यह देख आनन- फानन एफएसओ हजरतगंज रामकुमार रावत के नेतृत्व में चार टीमें गठित की गईं। दो टीमें अस्पताल को दोनों ओर से घेर कर आग बुझाने में जुट गई थीं। इस बीच एफएसओ आलमबाग दूसरी मंजिल पर फंसे लोगों को ढांढस बंधाते रहे। वह और फायरमैन रजनीश व पुष्पेंद्र सीढ़ियां लगाकर दूसरी मंजिल पर पहुंचे थे। उन्होंने सबसे पहले गंभीर मरीजों को अपने कंधों पर उठाकर बाहर निकाला।
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दूसरी टीम में सुशील कुमार व तीसरी टीम में एफएसओ सरोजनीनगर सुमित प्रताप सिंह भी लोगों को बचाने में जुट गए थे। राहत कार्य के दौरान एफएसओ हजरतगंज के हाथ और पैर में कांच लगने से वह जख्मी हो गए।
केमिकल से और जहरीला हो चुका था धुआं
सीएफओ ने बताया कि वार्डाें में रखी दवाओं और केमिकल के कारण धुआं और जहरीला हो गया था। ऐसे में टीम को ज्यादा परेशानी हुई।
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पांच घंटे चला रेस्क्यू
रेस्क्यू कार्य पांच घंटे तक चला। हालांकि दमकल कर्मियों ने चार ही घंटे में आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया था। इस बीच अस्पताल व आईसीयू में मौजूद डॉक्टरों ने भी दमकल कर्मियों की मदद की थी।
दमकल अधिकारी और कर्मचारियों की बिगड़ी तबीयत
ऑक्सीजन डेफिशिएंसी और अत्यधिक तापमान में रेस्क्यू के चलते सीएफओ मंगेश कुमार, एफएसओ गोमतीनगर सुशील कुमार, एफएसओ आलमबाग धर्मपाल सिंह, एफएसओ सरोजनीनगर सुमित प्रताप सिंह, एफएसओ चौक पुष्पेंद्र कुमार, फायरमैन राकेश गुप्ता, विवेक कुमार, प्रवेश कुमार व रजनीश सिंह की तबीयत बिगड़ गई।