बिना किसी ठोस सुबूत के फर्जी शिकायत करने वाले दो लोगों पर लोकायुक्त का शिकंजा कस गया है। उन्होंने दोनों शिकायतकर्ताओं को नोटिस जारी करके पूछा है कि क्यों न गलत साक्ष्य देने और झूठे आरोप लगाने के लिए उन्हें दंडित किया जाए।
इनमें से एक शिकायतकर्ता ने तो तत्कालीन राज्यपाल और तत्कालीन मुख्य सचिव तक की फर्जी शिकायत लोकायुक्त से की थी जिसे खारिज करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। लोकायुक्त अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार इन पर पांच हजार रुपये का जुर्माना तथा एक महीने की कैद हो सकती है।
लखनऊ के एमसी श्रीवास्तव ने राजधानी के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के निदेशक, फैकल्टी सदस्यों व अन्य विभागों में कार्यरत अधिकारियों के खिलाफ लोकायुक्त के समक्ष कुल 40 शिकायतें दाखिल की थीं।
इनमें एसजीपीजीआई के कुलाधिपति व राज्यपाल तथा मुख्य सचिव पर भी आरोप लगाए गए थे जबकि उनका इससे कोई संबंध नहीं था। लोकायुक्त ने सभी शिकायतों को खारिज करते हुए शिकायकर्ता को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।