महात्मा गांधी और देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पहली मुलाकात जिस शहर में हुई थी वह लखनऊ ही है। वर्ष था 1916 और महीना था दिसंबर। राजधानी में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन था, जिसमें महात्मा गांधी को आना था । गांधीजी से मिलने के लिए उस समय युवा जवाहर लाल नेहरू खासतौर पर लखनऊ आए थे। कांग्रेस के दो प्रमुख दिग्गजों की पहली मुलाकात का गवाह बने लखनऊ में आज कांग्रेस अपना वजूद तलाश रही है।
यह हाल यूं ही नहीं हुआ। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इसके लिए खुद कांग्रेस नेतृत्व ही जिम्मेदार है। पहले कांग्रेस के आपसी विभाजन ने लखनऊ में पार्टी को कमजोर किया और फिर हाईकमान के फैसलों ने। नया नेतृत्व उभारने में अपने और पराए के भेद के बीच अयोध्या आंदोलन ने कांग्रेस से जिस तरह प्रदेश में उसका मूल वोट छीना, वही हाल लखनऊ में भी हुआ। परिवारवाद का प्रभाव भी पड़ा और लखनऊ में पं. नेहरू की रिश्तेदार शीला कौल एवं विजय लक्ष्मी पंडित को स्थापित करने की कोशिशों ने दूसरों को कांग्रेस से दूर कर दिया।
कांशीराम के उभार ने कांग्रेस के दलित वोट बैंक में सेंध लगाई तो मुलायम की मुस्लिम हितैषी छवि ने राजधानी के मुसलमानों को कांग्रेस से विमुख करना प्रारंभ कर दिया । ऊपर, से प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व की स्थानीय नेतृत्व को उभारने में पक्षपातपूर्ण नीति ने भी राजधानी में पार्टी की जड़ों को हिला दिया। नतीजा यह हुआ कि कैलाशपति, कृष्णा रावत, तारा चंद्र सोनकर सहित नई पीढ़ी के कद्दावर नेता कांग्रेस से धीरे-धीरे अलग हो गए।
लखनऊ में वैसे तो 1984 के बाद कांग्रेस का ग्राफ गिरने लगा था। इसका असर 1989 के चुनाव में देखने को मिला, जब जनता दल से मांधाता सिंह चुनाव जीत कर आए। इसी के बाद अटल बिहारी वाजपेयी का युग आया, जब लखनऊ के बड़े ब्राह्मण नेता उनसे जुड़ गए। यह वह दौर था जब लखनऊ लोकसभा क्षेत्र से 14.3 फीसदी ब्राह्मण वोट कांग्रेस के पाले से खिसक कर भाजपा के पाले में आ गया।
1984 तक ही दिखी कांग्रेस
1952 लखनऊ के साथ बाराबंकी गंगा देवी, 1952 में सेंट्रल लखनऊ से विजय लक्ष्मी पंडित, 1957 पुलिन बिहारी बनर्जी, 1962 बीके धौन, 1967 में एएन मुल्ला, 1971 में शीला कौल, 1977 हेमवती नंदन बहुगुणा भारतीय लोक दल, 1980 में कांग्रेस से शीला कौल ने चुनाव जीता। 1984 में भी वही रहीं। 1989 में मांधाता सिंह जनता दल से जीते थे। इसी के बाद से लखनऊ लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस मुख्य धारा से कटती रही।