बसपा के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि गठबंधन के वोटों की शेयरिंग अच्छी तरह से हो गई तो सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दुहराना मुश्किल नहीं होगा। यही बात बसपा सुप्रीमो मायावती लगातार कह रही हैं। मगर, गठबंधन की ताकत को कई स्तर पर चुनौती मिल रही है।
पहला, पार्टी का टिकट वितरण का मैकेनिज्म चुनौतियां पेश कर रहा है। कई सीटों पर कांग्रेस के दमदार उम्मीदवार बसपा प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ाए हुए हैं। वहीं, कई सीटों पर भाजपा ने प्रत्याशी बदलकर और बसपा-सपा के लोगों को पार्टी के साथ जोड़कर चुनौतियां बढ़ाई हैं। ऐसे में बसपा के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दुहरा पाना आसान नजर नहीं आ रहा।
सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, फूलपुर, इलाहाबाद, अंबेडकरनगर, श्रावस्ती, डुमरियागंज, बस्ती, संतकबीरनगर, लालगंज, आजमगढ़, जौनपुर, मछलीशहर, भदोही, महराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर, रॉबर्ट्सगंज।
2009 : 27 में से जीती थीं ये 11 सीटें
अंबेडकरनगर, फूलपुर, बस्ती, संतकबीरनगर, देवरिया, बांसगांव, लालगंज, घोसी, सलेमपुर, जौनपुर व भदोही।
सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, अंबेडकरनगर, डुमरियागंज, संतकबीरनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर, जौनपुर, मछलीशहर व भदोही।
2019 : 27 में इन 16 सीटों पर बसपा प्रत्याशी मैदान में
सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, अंबेडकरनगर, श्रावस्ती, डुमरियागंज, बस्ती, संतकबीरनगर, देवरिया, बांसगांव, लालगंज, घोसी, सलेमपुर, जौनपुर, मछलीशहर, गाजीपुर व भदोही।