फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

...तो राजभर की काट के लिए भाजपा ने निषाद से मिलाया हाथ, ओमप्रकाश की सियासत पर संकट बनेंगे संजय !

Sun, 31 Mar 2019 05:24 AM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करते निषाद पार्टी के अध्यक्ष (फाइल फोटो।) - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
सरकार में साथ रहने के बाद भी विपक्षी होने का एहसास कराने वाले सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर और भाजपा के बीच चल रही खींचतान केबीच निषाद नेता संजय निषाद की भाजपा खेमें आमद के कई निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। 
विज्ञापन


माना जा रहा है कि इधर कुछ दिनों से लोकसभा सीट को लेकर राजभर केतेवर को देखते हुए भी भाजपा ने उनकी काट के लिए निषाद को ‘लांच’ कर पिछड़ों को थामने की कोशिश की है। 

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि निषाद की वजह से भाजपा में राजभर की अहमियत कम होना तय माना जा रहा है। हालांकि राजभर का कहना है कि उनकी सियासी सेहत पर निषाद के आने का कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
विज्ञापन


सूत्रों का कहना है कि एकाएक संजय निषाद का भाजपा के नजदीक आना अनायास नहीं है। बल्कि लोकसभा सीट को लेकर पिछले 15 दिनों ने राजभर के तेवर को देखते हुए भाजपा उनकी काट खोज रही थी। 

इसकी वजह यह थी पिछड़ी जातियों में प्रभावशाली माने जाने वाले पटेल व राजभर को साथ लेकर ही भाजपा ने 2014 की लोकसभा और 2017 के विधान सभा में बेहतर प्रदर्शन किया था। लेनिक राजभर के तेवर को देखते हुए भाजपा को यह लगने लगा था कि अगर राजभर से थोड़ा-बहुत नुकसान होता भी है उसकी भरपाई के लिए कोई दूसरा विकल्प तैयार कर लिया जाए।

भाजपा की यह भी रणनीति है कि अगर ओमप्रकाश का यही तेवर रहा तो भाजपा में पहले से मौजूद इस बिरादरी के एक-दो नेताओं को आगे कर ओमप्रकाश के प्रभाव को कम कर दिया जाएगा। 

सूत्रों का कहना है भाजपा द्वारा संजय निषाद को साथ लाए जाने से राजभर सीट मिलने की बची-खुची संभावना भी खत्म हो गई है। साथ ही भाजपा ने यह भी संदेश दे दिया है कि भाजपा के लिए राजभर की जो अहमियत 2017 के चुनाव में थी, वह अब इस लोकसभा चुनाव में नहीं रह गई गई है।

निषाद के आने से टूटेगा राजभर की मोनोपोली

माना जा रहा है कि संजय निषाद के भाजपा के साथ आने से ओम प्रकाश राजभर का ‘मोनोपोली’ (एकाधिकार) टूटेगी। सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने संजय निषाद के जरिए अति पिछड़ों में सर्वाधिक जनसंख्या वाले निषाद जाति व इससे संबंधित करीब 6-7 उपजातियों को साधने की कोशिश की है। 

अति पिछड़ों में निषाद समुदाय की करीब 12 प्रतिशत आबादी है, जो पिछड़ी जाति की पूरी आबादी में सर्वाधिक है। इसलिए भाजपा राजभर की नाराजगी से संभावित नुकसान से बचने के लिए ही संजय निषाद को साथ लाई है।
विज्ञापन

निषाद से सुभासपा को कोई नुकसान नहीं: राजभर

वहीं दूसरी ओर ओमप्रकाश राजभर का कहना है कि संजय निषाद के भाजपा केसाथ आने से सुभासपा के सियासी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। राजभर ने कहा कि निषाद समाज अलग-अलग खेमों में बटे हैं और सभी खेमों के अलग-अलग नेता हैं।

इसलिए वह भाजपा को कई फायदा नहीं पहुंचा पाएंगे। राजभर का कहना है कि गोरखपुर ही एक ऐसा सीट है, जहां पर निषादों से भाजपा को कुछ फायदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि सुभासपा को साथ रखना है या नहीं, यह फैसला तो भाजपा को ही करना है।

चुनाव लड़ने के संबंध में राजभर ने कहा कि सीट न देना भाजपा का अधिकार है, लेकिन सुभासपा को चुनाव लड़ने से रोक पाना उनके बस में नहीं है। पर इस पर फैसला हम एक अप्रैल को लेंगे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें