वोट किसे देना है, यह तय करने में अंतिम समय तक अनिर्णय की स्थिति में रहने वाले मतदाता इस श्रेणी में आते हैं। इनके लिए पार्टी या विचारधारा अहम नहीं। जिस पार्टी के प्रचार से प्रभावित हो जाएं या जिसे जीतता हुआ आंक लें, उधर चले जाते हैं। पार्टी की लीडरशिप या प्रत्याशी से प्रभावित होकर उसके साथ जा सकते हैं।आसपास के प्रभावशाली लोग जिधर जाते हैं, ये भी वही राह अपना सकते हैं।
फर्स्ट टाइम वोटर पर ज्यादा जोर
पीएम मोदी ने पिछले लोकसभा चुनाव में भी फर्स्ट टाइम वोटर को अपने अभियान के केंद्र में रखा था और इस चुनाव में भी वे यही अपील कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सपा मुखिया अखिलेश यादव युवाओं को जोड़ने पर लगातार फोकस कर रहे हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने युवाओं को पार्टी की ओर आकृष्ट करने के लिए अपने युवा भतीजे आकाश आनंद को साथ-साथ मंच पर ले जाना और आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है।
लुभावने वादे फ्लोटिंग वोटर को करते हैं प्रभावित
विश्लेषक बताते हैं कि फ्लोटिंग वोटर को लुभावने वादे अधिक प्रभावित करते हैं। ऐसे वादे जो सीधे उन्हें लाभ पहुंचाए। भाजपा का किसानों को नकद भुगतान, कांग्रेस का ‘न्याय’ का वादा भी ऐसी ही श्रेणी में आते हैं। मायावती नौकरी देने की बात कर रही हैं। अखिलेश यादव रोजगार देने की बात कर रहे हैं।