लखनऊ विश्वविद्यालय में बृहस्पतिवार को एक और फर्जी अंकपत्र पकड़ा गया। इससे माइग्रेशन बनवाने का प्रयास किया जा रहा था। गीतिका लांबा के नाम से यह अंकपत्र वर्ष 2004 में जारी किया गया था।
जांच में पता चला कि गीतिका के प्रथम वर्ष के अंकपत्र में कुल अंकों की संख्या तो सही थी, लेकिन प्रश्नपत्र में मिले नंबरों में अंतर था। वहीं, द्वितीय और तृतीय वर्ष में तो फेल होने के बावजूद अंकपत्र में पास के नंबर चढ़े थे। 3 नंबर के स्थान पर अंकपत्र में 33 और 4 नंबर के स्थान पर 44 कर दिया गया था।
एक वकील गीतिका लांबा के अंकपत्र के आधार पर माइग्रेशन बनवाने आया था। उसका कहना था कि यह अंकपत्र दिल्ली में रहने वाले उनकी किसी मित्र की बहन का है। जांच में अंकों में फेरबदल के साथ ही यह भी सामने आया कि गीतिका का प्रथम वर्ष का अंकपत्र सीएमएस डिग्री कॉलेज से है।