फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लखनऊ विश्वविद्यालय में फिर पकड़ा गया फर्जी अंकपत्र: तीन नंबर को कर दिया 33, चार को 44

Fri, 26 Apr 2019 12:37 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
विज्ञापन
लखनऊ विश्वविद्यालय
विज्ञापन
लखनऊ विश्वविद्यालय में बृहस्पतिवार को एक और फर्जी अंकपत्र पकड़ा गया। इससे माइग्रेशन बनवाने का प्रयास किया जा रहा था।  गीतिका लांबा के नाम से यह अंकपत्र वर्ष 2004 में जारी किया गया था। 
विज्ञापन


जांच में पता चला कि गीतिका के प्रथम वर्ष के अंकपत्र में कुल अंकों की संख्या तो सही थी, लेकिन प्रश्नपत्र में मिले नंबरों में अंतर था। वहीं, द्वितीय और तृतीय वर्ष में तो फेल होने के बावजूद अंकपत्र में पास के नंबर चढ़े थे। 3 नंबर के स्थान पर अंकपत्र में 33 और 4 नंबर के स्थान पर 44 कर दिया गया था।

एक वकील गीतिका लांबा के अंकपत्र के आधार पर माइग्रेशन बनवाने आया था। उसका कहना था कि यह अंकपत्र दिल्ली में रहने वाले उनकी किसी मित्र की बहन का है। जांच में अंकों में फेरबदल के साथ ही यह भी सामने आया कि गीतिका का  प्रथम वर्ष का अंकपत्र सीएमएस डिग्री कॉलेज से है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

वहीं, बाकी दोनों साल के अंकपत्र आईटी कॉलेज के हैं। विश्वविद्यालय में कुछ शर्तों के अधीन स्नातक की डिग्री पूरी होने से पहले भी कॉलेज बदलने की सुविधा मिलती है, लेकिन दोनों कॉलेज सेल्फ फाइनेंस होने चाहिए। 

पहला कॉलेज सेल्फ फाइनेंस हैं, जबकि दूसरा अनुदानित है। कॉलेज में कोर्स की पढ़ाई बंद होने पर भी अन्य कॉलेज में विद्यार्थी को स्थानांतरित किया जाता है। कुलसचिव एसके शुक्ल ने बताया कि मामला सामने आने पर तीनों वर्षों के अंकपत्र जब्त कर सील कर दिए गए। पुलिस मामले की जांच कर रही है। विश्वविद्यालय अपने स्तर से भी जांच कर रहा है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें