कठेरिया अब इटावा से मैदान में
पार्टी ने हालांकि बहुत बदलाव न करते हुए ज्यादातर सीटों पर मौजूदा सांसदों पर ही भरोसा जताया है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेन्द्र को उनकी मौजूदा सीट चंदौली से फिर लड़ाने का फैसला किया गया है। डॉ. मुरलीमनोहर जोशी के अलावा डॉ. नैपाल सिंह, इटावा से सांसद अशोक दोहरे, बाराबंकी से सांसद प्रियंका रावत, कुशीनगर से सांसद राजेश पाण्डेय गुड्डू और बलिया से भरत सिंह का टिकट काट दिया गया है। आगरा से दो बार सांसद रहे केंद्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष रामशंकर कठेरिया को इटावा से प्रत्याशी बनाया गया है। यहां से इस समय अशोक दोहरे सांसद हैं। बसपा से आए अशोक दोहरे के तेवर बीच में बागी हो गए थे। भदोही से मौजूदा सांसद और भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेन्द्र मस्त को पार्टी ने इस बार बलिया से उम्मीदवार बनाया है। यहां से सांसद भरत सिंह ने स्वास्थ्य कारणों से चुनाव लड़ने में असर्थता व्यक्त की थी।
डिंपल के खिलाफ फिर सुब्रत
भाजपा ने कन्नौज में अखिलेश यादव की पत्नी मौजूदा सांसद डिंपल यादव के खिलाफ एक बार फिर अपने युवा नेता सुब्रत पाठक पर दांव लगाया है। पाठक इस समय भाजपा के प्रदेश मंत्री हैं। पिछले चुनाव में इन्होंने डिंपल को कड़ी टक्कर दी थी।
विजय का एहसान चुकाया
कुशीनगर से उम्मीदवार बनाए गए विजय दुबे पहले कांग्रेस से विधायक रहे। विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद और राज्यसभा के चुनाव में विजय दुबे ने अपने दल से बगावत कर भाजपा का साथ दिया था। कुछ अन्य लोगों ने भी भाजपा का साथ दिया था। इनमें विजय दुबे को छोड़कर शेष को भाजपा ने किसी को विधानसभा का टिकट देकर तो किसी का अन्य तरीके से एहसान चुका दिया। पर, विजय दुबे को ही अभी तक कुछ नीं मिल पाया था।
इन सीटों पर अभी चुप्पी
पूर्वांचल की कई सीटों की घोषणा के बावजूद गोरखपुर सीट पर अभी किसी का एलान नहीं किया गया है। इसी प्रकार पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और अपने वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र की सीट पर अभी उम्मीदवार का एलान नहीं किया है। इसी प्रकार 2014 में चुनाव जीते केशव मौर्य की सीट फूलपुर पर भी उम्मीदवार का एलान अभी नहीं किया गया है। साथ ही सबसे चर्चित सीट संतकबीरनगर पर भी अभी चुप्पी साध रखी गई है। संतकबीरनगर से ही शरद त्रिपाठी सांसद हैं। जिनके और विधायक के बीच संघर्ष खबरों की सुर्खियां बना था।