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भाजपा ने यूपी में आठ महिलाओं को बनाया प्रत्याशी, 13 सांसदों का कटा टिकट

Wed, 27 Mar 2019 09:10 AM IST
sapna singla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

  • भाजपा ने गठबंधन सहित प्रदेश की 80 सीटों के लिए 62 उम्मीदवार घोषित
  • स्मृति ईरानी और जया प्रदा समेत 8 महिलाओं को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया
  • भाजपा के  मौजूदा 13 सांसद टिकट पाने में असफल रहे
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भाजपा ने इन आठ महिलाओं को बनाया है उम्मीदवार
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विस्तार
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भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश की 29 और लोकसभा सीटों के लिए प्रत्याशियों के नामों की चौथी सूची जारी कर दी है। इनमें पांच महिलाएं, 14 अगड़े, छह अनुसूचित जाति और नौ पिछड़े वर्ग के उम्मीदवार हैं। इसके साथ ही भाजपा ने गठबंधन सहित प्रदेश की 80 सीटों के लिए 62 उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। अब तक मेनका गांधी, रीता बहुगुणा जोशी, रेखा वर्मा, संघमित्रा मौर्य, निरंजन ज्योति, हेमा मालिनी, स्मृति ईरानी और जया प्रदा समेत 8 महिलाओं को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है। 13 सांसद टिकट पाने में नाकाम रहे हैं।

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पार्टी ने केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के लिए गठबंधन के घटक अपना दल को मिर्जापुर सीट पहले ही दे दी है। चौथी सूची में पार्टी ने सात सांसदों के टिकट काट दिए हैं, जबकि दो पहले ही पार्टी छोड़ गए थे। चार मौजूदा सांसदों को नई सीटों से लड़ाने का फैसला किया गया है। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी और उनके पुत्र वरुण गांधी की सीटों में अदला-बदली करते हुए मेनका को वरुण की जगह अमेठी के बगल सुल्तानपुर से और वरुण को पीलीभीत से लडा़ने का फैसला किया गया है। फिल्म अभिनेत्री जयाप्रदा रामपुर में आजम खां के खिलाफ उम्मीदवार बनाई गई हैं। सूची में प्रदेश सरकार के दो मंत्रियों सहित कुल पांच मंत्री उम्मीदवार घोषित किए गए हैं।

जोशी की जगह पचौरी, गुप्त की जगह जोशी

इस सूची में केंद्रीय मंत्रियों में मेनका के अलावा साध्वी निरंजन ज्योति और मनोज सिन्हा को भी उम्मीदवार घोषित किया है। निरंजन ज्योति को उनकी मौजूदा सीट फतेहपुर से और मनोज सिन्हा को गाजीपुर से उम्मीदवार बनाया गया है। प्रदेश सरकार के दो मंत्री सत्येदव पचौरी और डॉ. रीता बहुगुणा जोशी सहित दो विधायकों को भी चुनाव मैदान में उतारा गया है।

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पचौरी को डॉ. मुरली मनोहर जोशी की जगह कानपुर से और डॉ. रीता बहुगुणा जोशी को पिछले दिनों पार्टी छोड़ गए मौजूदा सांसद श्याचरण गुप्त की जगह इलाहाबाद से लड़ाने का फैसला किया गया है। सावित्री बाई फूल की जगह भाजपा ने प्रदेश उपाध्यक्ष और विधायक अक्षयवर लाल गौड़ को टिकट दिया है जबकि बाराबंकी से सांसद प्रियंका रावत का टिकट काटकर उनकी जगह बाराबंकी के ही जैदपुर से पार्टी विधायक उपेन्द्र रावत को उम्मीदवार बनाया है।

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कठेरिया अब इटावा से मैदान में
पार्टी ने हालांकि बहुत बदलाव न करते हुए ज्यादातर सीटों पर मौजूदा सांसदों पर ही भरोसा जताया है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेन्द्र को उनकी मौजूदा सीट चंदौली से फिर लड़ाने का फैसला किया गया है। डॉ. मुरलीमनोहर जोशी के अलावा डॉ. नैपाल सिंह, इटावा से सांसद अशोक दोहरे, बाराबंकी से सांसद प्रियंका रावत, कुशीनगर से सांसद राजेश पाण्डेय गुड्डू और बलिया से भरत सिंह का टिकट काट दिया गया है। आगरा से दो बार सांसद रहे केंद्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष रामशंकर कठेरिया को इटावा से प्रत्याशी बनाया गया है। यहां से इस समय अशोक दोहरे सांसद हैं। बसपा से आए अशोक दोहरे के तेवर बीच में बागी हो गए थे। भदोही से मौजूदा सांसद और भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेन्द्र मस्त को पार्टी ने इस बार बलिया से उम्मीदवार बनाया है। यहां से सांसद भरत सिंह ने स्वास्थ्य कारणों से चुनाव लड़ने में असर्थता व्यक्त की थी।

डिंपल के खिलाफ फिर सुब्रत
भाजपा ने कन्नौज में अखिलेश यादव की पत्नी मौजूदा सांसद डिंपल यादव के खिलाफ एक बार फिर अपने युवा नेता सुब्रत पाठक पर दांव लगाया है। पाठक इस समय भाजपा के प्रदेश मंत्री हैं। पिछले चुनाव में इन्होंने डिंपल को कड़ी टक्कर दी थी।

विजय का एहसान चुकाया
कुशीनगर से उम्मीदवार बनाए गए विजय दुबे पहले कांग्रेस से विधायक रहे। विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद और राज्यसभा के चुनाव में विजय दुबे ने अपने दल से बगावत कर भाजपा का साथ दिया था। कुछ अन्य लोगों ने भी भाजपा का साथ दिया था। इनमें विजय दुबे को छोड़कर शेष को भाजपा ने किसी को विधानसभा का टिकट देकर तो किसी का अन्य तरीके से एहसान चुका दिया। पर, विजय दुबे को ही अभी तक कुछ नीं मिल पाया था।

इन सीटों पर अभी चुप्पी
पूर्वांचल की कई सीटों की घोषणा के बावजूद गोरखपुर सीट पर अभी किसी का एलान नहीं किया गया है। इसी प्रकार पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और अपने वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र की सीट पर अभी उम्मीदवार का एलान नहीं किया है। इसी प्रकार 2014 में चुनाव जीते केशव मौर्य की सीट फूलपुर पर भी उम्मीदवार का एलान अभी नहीं किया गया है। साथ ही सबसे चर्चित सीट संतकबीरनगर पर भी अभी चुप्पी साध रखी गई है। संतकबीरनगर से ही शरद त्रिपाठी सांसद हैं। जिनके और विधायक के बीच संघर्ष खबरों की सुर्खियां बना था।
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