सपा के प्रदेश अध्यक्ष और एमएलसी नरेश उत्तम पटेल मानते हैं कि भाजपा सिर्फ टीवी और अखबारों के दम पर ऑक्सीजन ले रही है। यूपी में जमीन पर उसका कोई वजूद नहीं रह गया है। यहां गठबंधन 78 सीटें जीतेगा। वह चुनाव आयोग पर भाजपा और उसकी सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप लगाने से भी नहीं चूकते।
कहते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुनाव आयोग की पाबंदी के आदेश का भी पालन नहीं कर रहे। धार्मिक ध्रुवीकरण का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। फिर सवाल करते हैं कि आयोग इसका संज्ञान क्यों नहीं ले रहा है। साथ ही कहते हैं कि कांग्रेस अमेठी और रायबरेली केअलावा कहीं और से नहीं जीतेगी। प्रस्तुत है पटेल से बातचीत के मुख्य अंश :
यूपी में गठबंधन को कितनी सीटें मिलेंगी?
गठबंधन को 78 सीटें मिलेंगी। कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें रायबरेली और अमेठी मिलेंगी। भाजपा शून्य पर आउट होगी।
ऐसा कहने के पीछे का आधार क्या है?
पूरे प्रदेश में घूमा हूं। भाजपा से लोग परेशान हैं। इन्होंने एक भी चुनावी वादा पूरा नहीं किया। गन्ना किसानों का करोड़ों बकाया है। लागत मूल्य पर भी आलू नहीं बिक रहा। योगी-मोदी सिर्फ हवा-हवाई बातें कर रहे हैं। भाजपा तो पहले चरण के चुनाव में ही पूरी तरह साफ हो गई है। कांग्रेस को लेकर भी मतदाता आशान्वित नहीं हैं।
क्या गठबंधन के वोट एक-दूसरे को ट्रांसफर हो रहे हैं?
जी हां, पूरी तरह से ट्रांसफर हो रहे हैं। बूथ स्तर पर सपा, बसपा और रालोद के कार्यकर्ता मिलकर काम कर रहे हैं। गठबंधन मध्य प्रदेश में भी कई सीटें जीतेगा। सपा को वहां खजुराहो, टीकमगढ़ और बालाघाट सीटें मिलने जा रही हैं।
गठबंधन के साथ मतदाताओं के आने के पीछे की रणनीति क्या है?
हमारी कोई रणनीति नहीं है। सच्चाई, समाजवाद और सामाजिक न्याय ही हमारा आधार है। आमजन समझ चुका है कि समाजवाद और सामाजिक न्याय का सपना गठबंधन की मजबूती से ही पूरा हो सकता है।
बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा नेता आजम खां पर चुनाव आयोग की पाबंदी को किस रूप में ले रहे हैं?
यह चुनाव आयोग का पक्षपातपूर्ण रवैया है। आयोग पूरी तरह भाजपा और उसकी सरकार के इशारे पर काम कर रहा है। भाजपा के नेता खुलेआम आचार संहिता की धज्जियां उड़ा रहे हैं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।
बहनजी (मायावती) ने संसदीय शब्दों का प्रयोग करते हुए अपनी बात रखी थी, लेकिन सीएम योगीजी ने तो शालीनता की सारी मर्यादाएं ही तार-तार कर दी हैं। बहनजी पर आयोग ने पाबंदी लगाई तो वह उसका पूरी तरह पालन कर रही हैं, जबकि पाबंदी सीएम योगी आदित्यनाथ पर भी लगाई गई है।
वे मंदिरों में जाकर धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इस बार पब्लिक उनके झांसे में आने वाली नहीं है।
भाजपा और कांग्रेस से किस तरह की चुनौतियां मिल रही हैं?
दोनों पार्टियां यूपी में जमीन पर कहीं नहीं दिख रही हैं। भाजपा की वादाखिलाफी के कारण आम मतदाता उससे चिढ़ा बैठा है। 23 मई को रिजल्ट इसे साबित कर देगा।
फिरोजाबाद में सपा के कुछ विधायक पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी अक्षय यादव के बजाय प्रसपा संयोजक शिवपाल यादव का समर्थन कर रहे हैं?
यह बात एकदम निराधार है। सपा का एक-एक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि मिलकर रामगोपाल यादव के पुत्र व सांसद अक्षय यादव को पूरी शिद्दत से चुनाव लड़ा रहे हैं। अक्षय डेढ़ लाख से ज्यादा मतों से जीतेंगे।
कई सीटों पर कांग्रेस गठबंधन को नुकसान पहुंचाते हुए दिख रही है?
कांग्रेस को लेकर आम मतदाता बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। कांग्रेस गठबंधन को कहीं नुकसान नहीं पहुंचा रही है। कांग्रेस जो थोड़ा-बहुत वोट पाएगी, वो भाजपा का ही काटेगी।
इलाहाबाद, लखनऊ समेत 8 सीटों पर अभी तक सपा कैंडिडेट नहीं दे पाई है?
सभी टिकट फाइनल हो चुके हैं। गुरुवार तक मीडिया को भी नाम दे दिए जाएंगे।