प्रदेश में कई-कई बार के विधायक, सांसद और पूर्व सांसद जोड़-तोड़, जातीय समीकरण में सेट न हो पाने की वजह से प्रमुख दलों के टिकट का इंतजार करते रह गए। वहीं, कई ऐसे खुशकिस्मत हैं, जिन्होंने 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ा और हार गए, लेकिन देश की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा का टिकट झटक लाए। कई ऐसे भी हैं जो 2014 के मोदी लहर में लोकसभा चुनाव हार गए थे, लेकिन फिर से मैदान में हैं।
ऐसे चेहरे लगभग सभी प्रमुख दलों में नजर आ रहे हैं। प्रदेश में विधायक और मंत्री बनने का अवसर प्राप्त कर चुके और सांसदी के चुनाव में पूर्व में भाग्य आजमाकर हारने वाले चेहरों की पूरी फौज मैदान में है, लेकिन वे चर्चा के केंद्र में ज्यादा है जो अब तक विधानसभा तक की चौखट पार नहीं कर पाए हैं। इनमें से कई प्रत्याशी स्थानीय समीकरण में काफी मजबूत नजर आ रहे हैं।
सियासत की कसौटी पर जातीय समीकरण किस कदर प्रभावी रहे हैं, इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि इनमें से कई तो कुछ महीने पहले तक किसी दल के साथ थे। चुनाव के बीच दूसरे दल में आए और टिकट पाने में कामयाब रहे।
भाजपा
रवि किशन : भोजपुरी फिल्म स्टार रवि किशन ने पिछला लोकसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर अपने गृह जिले जौनपुर से लड़ा था। हालांकि वह हार गए थे। इस बार भाजपा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की परंपरागत सीट गोरखपुर से उनको प्रत्याशी बनाया है। भाजपा यह सीट उपचुनाव में सपा से हार गई थी। हालांकि सपा से जीतने वाले सांसद प्रवीण निषाद अब भाजपा में आ चुके हैं।
डॉ. चंद्रसेन जादौन : पेशे से चिकित्सक डॉ. जादौन भाजपा के पुराने नेता हैं। भाजपा ने उन्हें फिरोजाबाद से प्रत्याशी बनाया है। जादौन 1996 में घिरोर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे, लेकिन तीसरे नंबर पर रहे। वह 23 वर्ष बाद देश की सबसे बड़ी पंचायत के लिए भाग्य आजमाएंगे।
सुब्रत पाठक : कन्नौज लोकसभा सीट से भाजपा ने सुब्रत को पिछला चुनाव लड़ाया था। भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहे सुब्रत पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी सपा प्रत्याशी डिम्पल यादव से हार गए थे। भाजपा ने सुब्रत को फिर कन्नौज से प्रत्याशी बनाया है।
बीपी सरोज : जौनपुर जिले की दूसरी लोकसभा सीट मछलीशहर से भाजपा ने बीपी सरोज को प्रत्याशी बनाया है। सरोज ने पिछला लोकसभा चुनाव बसपा से लड़ा था और दूसरे नंबर पर थे।
बसपा
अशोक कुमार त्रिपाठी : अरुणाचल प्रदेश पुलिस सेवा में रहे अशोक ने पिछला विधानसभा चुनाव बसपा के टिकट पर प्रतापगढ़ सदर सीट से लड़ा था। अशोक तीसरे नंबर पर थे। इस बार बसपा ने उन्हें प्रतापगढ़ से ही लोकसभा का प्रत्याशी बनाया है।
अतुल राय : पूर्वांचल में अपनी दबंगई से सुर्खियों में रहने वाले अतुल ने पिछला विधानसभा चुनाव गाजीपुर की जमनिया सीट से लड़ा था। वह दूसरे नंबर पर रहे थे। इस बार बसपा ने उन्हें घोसी लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है।
आफताब आलम : बसपा ने आफताब को 2017 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर की पिपराइच सीट से प्रत्याशी बनाया था। वह नंबर दो पर थे। इस बार पार्टी ने उन्हें डुमरियागंज लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है।
नीलू सत्यार्थी : बसपा ने सीतापुर जिले की मिश्रिख सुरक्षित सीट से नीलू सत्यार्थी को प्रत्याशी बनाया है। उनके पति पुष्पसेन सत्यार्थी परिवहन विभाग में आरटीओ हैं। नीलू ने 2017 का विधानसभा चुनाव हरदोई की बालामाऊ सीट से लड़ा था। वह नंबर दो पर रही थीं।
कांग्रेस :
तनुज पुनिया : वरिष्ठ कांग्रेस नेता व राज्यसभा सांसद पीएल पुनिया के बेटे तनुज ने पिछला विधानसभा चुनाव बाराबंकी की मसौली विधानसभा सीट से लड़ा था। वह भाजपा प्रत्याशी से हारकर नंबर दो पर थे। इस बार कांग्रेस ने तुनज को बाराबंकी से लोकसभा का प्रत्याशी बनाया है।
सपा-
सुरेश बंसल : पिछले विधानसभा चुनाव में बंसल गाजियाबाद से बसपा के प्रत्याशी थे। वह भाजपा के अतुल गर्ग से हारे थे। इस बार सपा ने उन्हें गाजियाबाद लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है।