लोकसभा चुनाव ड्यूटी के लिए कार्मिकों का प्रशिक्षण 15 अप्रैल से शुरू हो रहा है। इसके लिए बुलावा पत्र पहुंचते ही चुनाव ड्यूटी कटवाने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर स्थित प्रभारी अधिकारी के कक्ष के बाहर भीड़ जुटने लगी है।
गुरुवार को बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने घर में बेटा-बेटी की शादी या बीमारी की दुहाई देते हुए चुनाव ड्यूटी से नाम हटवाने की गुहार प्रभारी अधिकारी कार्मिक व एडीएम वित्त-राजस्व से लगाई। किसी के पास शादी का कार्ड था तो कोई डॉक्टरी पर्चा लेकर पहुंचा था।
प्रभारी अधिकारी ने सभी को भरोसा दिलाया कि वास्तविक जरूरतमंदों को प्रशासन चुनाव ड्यूटी से राहत दिलाने की पूरी कोशिश करेगा। इसके लिए 15 अप्रैल को प्रशिक्षण शुरू होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड में कार्मिकों द्वारा बताई गई बीमारी को परखा जाएगा। मेडिकल बोर्ड अनुमति देगा तो ऐसे कार्मिकों को चुनाव ड्यूटी से राहत दिलाई जाएगी।
वहीं शादी के मामलों में आवेदकों द्वारा प्रस्तुत शादी कार्ड का सत्यापन होगा। जिन आवेदकों के पुत्र-पुत्री या सगे भाई-बहन की शादी मतदान दिवस या इसके आसपास होगी, उन्हें चुनाव ड्यूटी से राहत दी जाएगी। मालूम हो कि राजधानी की दोनों सीटों पर मतदान छह मई को है।
इस दिन सहालग भी काफी तेज है। मतदान ड्यूटी में लगे कई कार्मिकों घर में शादी है। इसीलिए चुनाव ड्यूटी से राहत पाने की जुगत में लग गए हैं।
650 कार्मिक बीमार, 175 के घर शादी
चुनाव ड्यूटी में लगे 27 हजार कार्मिकों के पहले प्रशिक्षण का बुलावा पत्र जारी हो चुका है। प्रभारी अधिकारी के अनुसार बीते दो दिन में करीब 175 कार्मिकों ने घर में शादी का कार्ड दिखाते हुए चुनाव ड्यूटी से नाम हटवाने का आवेदन दिया है।
दूसरी तरफ 683 कार्मिकों ने बीमारी का हवाला देते हुए डॉक्टरी पर्चे के साथ ड्यूटी से राहत का आवेदन किया है।
किसी ने हृदय की बीमारी, किसी ने गंभीर शुगर तो किसी ने किडनी की बीमारी बताई है। कई कर्मचारियों ने पत्नी, बुजुर्ग माता-पिता या बच्चे की बीमारी का भी हवाला दिया है।
प्रभारी अधिकारी कार्मिक अवनीश सक्सेना ने सभी आवेदनों को स्वीकार करते हुए बताया कि सभी को 15 अप्रैल से प्रशिक्षण से पहले आयोजित मेडिकल बोर्ड में पेश होना होगा। डॉक्टरी सत्यापन के बाद ही ड्यूटी से की संस्तुति की जाएगी।
कुछ जायज तो कई कर रहे बहानेबाजी
एडीएम वित्त-राजस्व भी मानते हैं कि बीमारी के कारण ड्यूटी से राहत दिलाने को प्राप्त आवेदनों में से कुछ तो जायज हैं। उन्हें राहत दिलाने का हर संभव प्रयास करेंगे। वहीं कई आवेदन तो प्रथम दृष्टया देखने में ही बीमारी का बहाना समझ आ रहे हैं। इनके साथ प्रशासन पूरी सख्ती बरतेगा। इसीलिए सभी आवेदनों को मेडिकल बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा।
नेता और मंत्री की सिफारिश
चुनाव ड्यूटी से बचने के लिए कर्मचारियों ने मंत्री, विधायक से लेकर शासन में बैठे अफसरों से भी सिफारिश लगवाना शुरू कर दिया है। किसी को ड्यूटी से राहत दिलाने के लिए सचिवालय में तैनात अनुभाग प्रभारी फोन कर रहे हैं तो कई के पक्ष में विधायकों के साथ राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के वरिष्ठ पदाधिकारी भी अफसरों को फोन कर दे रहे हैं।