कांग्रेस दूसरे दलों के बागियों और असंतुष्टों के लिए बड़ी शरणगाह बनकर उभरी है। सपा, बसपा व एनडीए के पूर्व सांसद ही नहीं, भाजपा के मौजूदा सांसदों के लिए भी कांग्रेस ने न सिर्फ अपने दरवाजे खोले, बल्कि उन्हें अपना प्रत्याशी भी बनाया। अपने कार्यकर्ताओं की नाराजगी की परवाह किए बिना उन्हें चुनाव मैदान में उतारा। कांग्रेसी सूत्रों की मानें तो दूसरे दलों के नेताओं को शरण देने का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
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सावित्री बाई फुले, सांसद
सांसद सावित्री बाई फुले पहली बार वर्ष 2012 में भाजपा के टिकट पर बहराइच की बलहा सीट से विधानसभा चुनाव जीतीं। वर्ष 2014 में वह भाजपा के टिकट पर ही बहराइच सुरक्षित सीट से लोकसभा के लिए चुनी गईं। बताते हैं कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ टिकट के मुद्दे पर उनके कुछ मतभेद उभरे। समय के साथ ये मतभेद इतना बढ़े कि उन्होंने पार्टी से बगावत कर दी। कुछ दिनों पहले उन्होंने कांग्रेस ज्वॉइन कर ली। कांग्रेस ने उन्हें बहराइच से ही अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है।
अशोक दोहरे, सांसद
भाजपा ने सांसद अशोक दोहरे का टिकट काटकर इटावा से अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष रामशंकर कठेरिया को टिकट दे दिया। तभी से दोहरे ने बगावती तेवर अपना लिए। शुक्रवार को उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस की सदस्यता ली। इसके कुछ ही देर बाद कांग्रेस ने उन्हें इटावा से टिकट दे दिया। दोहरे बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। वर्ष 2014 में वे पहली बार सांसद चुने गए थे।
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राकेश सचान, पूर्व सांसद
फतेहपुर से सपा के पूर्व सांसद राकेश सचान को भी कांग्रेस ने मैदान में उतारा है। सचान ने सपा-बसपा गठबंधन का खुलकर विरोध किया था। सचान 1993-96 और 2002-2007 तक प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे हैं। वर्ष 2009 में वे सपा के टिकट पर लोकसभा सदस्य चुने गए। वर्ष 2014 में भी सपा ने उन्हें लोकसभा का टिकट दिया, पर वे मोदी लहर में हार गए। इस बार कांग्रेस के सहारे चुनावी नैया पार करने के लिए प्रयासरत हैं।
मंजरी राही
भाजपा से कांग्रेस में अपने ससुर व पूर्व केंद्रीय मंत्री रामलाल राही के साथ 14 फरवरी को शामिल हुईं मंजरी राही को पार्टी ने मिश्रिख सुरक्षित सीट से मैदान में उतारा है। रामलाल राही चार बार मिश्रिख सीट से ही एमपी रह चुके हैं। नरसिम्हा राव सरकार में वे केंद्रीय गृह राज्यमंत्री थे। रामलाल के छोटे पुत्र सुरेश राही अभी भी हरगांव से भाजपा के विधायक हैं। कांग्रेस हाईकमान को भरोसा है कि मंजरी राही अपने ससुर की विरासत को आगे बढ़ाएंगी।
कैसरजहां, पूर्व सांसद
चुनाव की घोषणा से कुछ दिन पूर्व ही बसपा की पूर्व सांसद कैसर जहां ने कांग्रेस का दामन थामा। कैसर जहां वर्ष 2009 में बसपा के टिकट पर सीतापुर से लोकसभा के लिए चुनी गई थीं। बाद में उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए बसपा ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था। कांग्रेस के ही एक बड़े नेता ने उनकी ज्वॉइनिंग के लिए मजबूत पैरवी की थी। हालांकि बाद में उन्हें कैसर जहां को सीतापुर से कांग्रेस का टिकट मिलने पर अपनी सीट के समीकरण गड़बड़ाने की आशंका परेशान करने लगी।
बाल कृष्ण, पूर्व सांसद
घोसी सीट पर बसपा के पूर्व सांसद बाल कृष्ण चौहान को कांग्रेस ने उतारा है। बाल कृष्ण चौहान ने सपा-बसपा गठबंधन का विरोध किया था, जिसके बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। घोसी से उन्होंने बसपा के टिकट पर 1999 का लोकसभा चुनाव जीता था। वर्ष 2014 में सपा ने उन्हें लोकसभा टिकट दिया था, पर ऐन वक्त पर इसे कैंसिल करते हुए राजीव राय को लड़ा दिया। वर्ष 2017 में चौहान पुन: बसपा में शामिल हो गए थे।
ओमवती देवी जाटव, पूर्व सांसद
कांग्रेस ने नगीना सुरक्षित सीट पर पूर्व सांसद व पूर्व मंत्री ओमवती देवी जाटव को टिकट दिया है। ओमवती पहली बार 1985 में वे कांग्रेस के टिकट पर नगीना से विधायक चुनी गईं। बाद में सपा में चली गईं। 1996 में सपा के टिकट पर नगीना से विधायक बनीं और 1997 में सपा के टिकट पर ही लोकसभा के लिए चुनी गईं। 2002 में सपा और 2007 में बसपा के टिकट पर विधायक बनीं। 2014 में लोकसभा के टिकट के लिए वह भाजपा में शामिल हुईं, लेकिन टिकट नहीं मिल सका। कुछ समय पूर्व उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा।
सपा-बसपा व जदयू (एनडीए) से लोकसभा चुनाव लड़ चुके पूर्व सांसद सर्वराज सिंह को इस बार कांग्रेस का साथ मिला है। उन्हें आंवला लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस ने टिकट दिया है। सर्वराज 11वीं, 13वीं और 14वीं लोकसभा में आंवला का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। पहली बार वे जनता दल के टिकट पर बरेली के सन्हा (अब बिथरी चैनपुर) विधानसभा क्षेत्र से चुने गए थे। उन्होंने तब के दिग्गज कांग्रेसी नेता स्व. रामेश्वर नाथ चौबे को शिकस्त दी थी।
राम शंकर भार्गव, पूर्व सांसद
सीतापुर की मिश्रिख लोकसभा सीट से बसपा के सांसद रहे राम शंकर भार्गव ने भी हाल ही में कांग्रेस की सदस्यता ली। उन पर कांग्रेस ने मोहनलालगंज सुरक्षित सीट से दांव लगाया है।