सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोरखपुर और वाराणसी में येन-केन प्रकरेण चुनाव जीतने के लिए सपाइयों का उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त, नई दिल्ली को भेजे पत्र में अखिलेश ने कहा जिला प्रशासन और पुलिस सपा कार्यकर्ताओं को बेवजह परेशा नकर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद गोरखपुर में मौजूद रहकर अधिकारियों को समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को पराजित कराने के लिए निर्देशित करने का काम कर रहे हैं।
अखिलेश यादव ने लिखा है कि गोरखपुर के कैंट थाना के प्रभारी निरीक्षक ने सपा पार्षद संजय यादव को थाने पर लाकर भाजपा को जिताने का दबाव बनाया। उसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर कैंट प्रभारी निरीक्षक ने एक भाजपा नेता से फर्जी तहरीर लेकर उन्हें जेल भिजवा दिया। यह काम क्षेत्र में दहशत फैलाने के लिए किया गया।
अखिलेश यादव ने कहा है कि गोरखपुर और वाराणसी लोकसभा क्षेत्र के ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और कोटेदारों को बुलाकर राज्य सरकार के मंत्री धमका रहे हैं। उन्हें प्रलोभन भी दे रहे हैं। सपा के प्रभावशाली नेताओं के घरों पर पुलिस छापा डालकर डरा धमकाकर भाजपा के पक्ष में मतदान के लिए दबाव बना रही है।
वाराणसी में भाजपा के दबाव में सरकारी तंत्र काम कर रहा है। प्रशासन ने समाजवादी पार्टी को कई सभाएं करने की इजाजत नहीं दी, जबकि प्रधानमंत्री के पक्ष में प्रचार के लिए दर्जनों छोटे बड़े नेताओं की सभाएं बेरोकटोक हुईं। भाजपा प्रत्याशी नरेंद्र मोदी के प्रचार के लिए होर्डिंग से लेकर चुनाव कार्यालयों पर भारी खर्च हो रहा है, जिसको चुनाव पर्यवेक्षक भी नजरअंदाज किए हैं।
सपा अध्यक्ष ने कहा है कि गोरखपुर और वाराणसी के प्रशासन का यह आचरण अवैधानिक और अनैतिक के साथ स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए गंभीर खतरा है।
अगर चुनाव आयोग ने गोरखपुर में मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों व जिला पुलिस प्रशासन की इस तरह की गतिविधियों पर रोक न लगाई गई, आखिरी चरण का मतदान निष्पक्ष होना संभव नहीं होगा। उन्होंने आयोग से इस संबंध में तत्काल दखल देने की मांग की है।