क्रांतिकारियों की स्मृति में काकोरी में बना स्मारक, आम के लिए मशहूर मलिहाबाद, पुरातात्विक स्थल हुलासखेड़ा समेत कई प्रमुख मंदिर भी यहां हैं। लोगों का दर्द है कि न पहले वालों ने ध्यान दिया और न मौजूदा सांसद ने। आम बागान के किसानों के लिए सुविधाओं का अभाव और छुट्टा पशुओं के आश्रय स्थलों की दुर्दशा भी क्षेत्र में बड़ा मुद्दा है।
इस वादे को कब पूरा करेंगे मोदी
बाग मालिकों का दर्द है कि मोदी ने आम किसानों के लिए कई वादे किए, पर एक भी पूरा नहीं हुआ। मो. शरीफ कहते हैं कि गठबंधन और भाजपा में मुकाबला है। अखिलेश ने मंडी बनवानी शुरू की, उसका काम बंद हो गया। बिजली महंगी हो गई। सिंचाई के दाम बढ़ गए। आम निर्यात की सुविधा और आम फसल सुरक्षित रखने की योजना नहीं।
मोदी मैजिक का भरोसा बरकरार
करौरा बाजार में पान की दुकान पर मिले श्रवण मिश्र कहते हैं, ‘किसान सम्मान राशि नहीं मिली क्योंकि लेखपाल नाराज है। सांसदजी पांच साल में एक बार भी नहीं आए, पर वोट मोदी को दूंगा।’ मोहाली के रामआधार और करौरा के गरीबे को गठबंधन भारी दिख रहा है। सेवईं रेलवे क्रॉसिंग पर मिले रामपाल खुद को कौशल का रिश्तेदार बताते हुए कहते हैं, कौशल नाहीं मिले और न काम किहिन। मुल मोदी का तौ जितावे का ही है। यहीं रामचरन यादव कहते हैं, 2014 और 2017 में भाजपा को वोट दिया। पर, सांसद के दर्शन तक नहीं हुए। इस बार गठबंधन को दूंगा। आशीष शुक्ल और गुड्डू द्विवेदी भी कहते हैं, चुनाव कौशल का नहीं, मोदी का है। पाकिस्तान को सबक सिखाने का माद्दा मोदी में ही है। इसलिए कौशल हों या कोई और होता तो, उसे वोट देते। श्रीकांत और सौरभ कहते हैं, मोहनलालगंज में सरकारी डिग्री कॉलेज न होना तकलीफ देता है। इलाज के लिए वर्षों पहले खुले एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का सहारा है। स्थानीय सांसद के काम और छवि पर वोट मिलना होता तो न मिलता।