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कैसे हो पढ़ाई ः लोहिया संस्थान में एक कमरे में चार मेडिकल छात्र, कॉमन रूम में 20

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लखनऊ। डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में हॉस्टल निर्माण में हो रही देरी का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। हालत यह है कि एक कमरे में चार-चार छात्रों को रखा गया है। करीब 20 छात्रों को कॉमन रूम में रखा गया है। ऐसे में उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।
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लोहिया संस्थान में एक 11 मंजिला हॉस्टल प्रशासनिक भवन के बगल में है। दूसरा शहीद पथ पर स्थित नए कैंपस में बन रहा है। इसकी जिम्मेदारी निर्माण निगम को सौंपी गई है। उम्मीद थी कि इस सत्र में एडमिशन से पहले यह हॉस्टल बन जाएगा। ऐसे में नए सत्र में एडमिशन लेने वाले छात्रों और कुछ रेजीडेंटों को वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा, लेकिन अभी तक निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। इसका खामियाजा 2019 बैच के छात्रों को उठाना पड़ रहा है। एक कमरे में चार-चार छात्रों को रखा गया है। छात्रों का आरोप है कि कमरे में पैर रखने तक की जगह नहीं है। करीब 20 छात्रों को कॉमन रूम में रखा गया है।
सुर्खियों में है सेकंड फ्लोर
लोहिया संस्थान में 2017 व 2018 बैच में 150-150 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया, जबकि 2019 बैच में सीटें बढ़ गईं और 200 छात्रों को प्रवेश मिला। प्रशासनिक भवन के बगल में स्थित 11 मंजिला हॉस्टल है। इसमें दूसरी मंजिल से छठवीं मंजिल तक छात्रों के कमरे हैं। अन्य फ्लोर पर रेजीडेंट व अन्य स्टाफ को रखा गया है। इस साल एडमिशन लेने वाले छात्रों का ठिकाना दूसरी मंजिल है। इस मंजिल पर 25 कमरे और कॉमन रूम है। नया हॉस्टल न मिलने पर इन्हीं कमरों और कॉमन रूम में छात्रों को एडजस्ट किया गया है।
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हर प्रयास रहा नाकाफी
शहीद पथ के पास बन रहे लोहिया संस्थान के नए परिसर में हॉस्टल निर्माण की कवायद करीब दो साल से चल रही है। बारिश में एक दीवार टेढ़ी होने की भी शिकायत मिली थी। मंद गति से कार्य होने से कार्यदायी संस्था निर्माण निगम के दो अफसरों पर गाज भी गिर चुकी है। एक को स्थानांतरित किया गया था तो दूसरे को प्रतिकूल प्रविष्टि भी दी गई। उम्मीद है कि अक्तूबर अंत तक निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। इस हॉस्टल में अगले सत्र में छात्र रह सकेंगे।
जल्द होगा समाधान
नए हॉस्टल के निर्माण कार्य में देरी की वजह से दिक्कत हुई है। फिर भी छात्रों को रहने की व्यवस्था कर दी गई है। सेकंड फ्लोर के कमरे बडे़ हैं। इस वजह से एक कमरे में चार-चार छात्रों को रखा गया है। नया हॉस्टल तैयार होते ही समस्या का समाधान हो जाएगा।
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- प्रो. एके त्रिपाठी, निदेशक लोहिया संस्थान
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