राजधानी के एकमात्र सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज आईईटी में भी प्लेसमेंट की हालत चिंताजनक हैं। यहां तीन महीने से प्लेसमेंट नहीं हुआ है। अब ऑनलाइन प्लेसमेंट की तैयारी चल रही है। वहीं, होली के बाद जो चुने गए, अभी तक उनकी ज्वॉइनिंग नहीं हुई है।
वहीं, शहर के इकलौते केंद्रीय विश्वविद्यालय बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में पिछले महीने एक कंपनी का ऑनलाइन इंटरव्यू होना था, लेकिन हुआ नहीं। यहां के प्लेसमेंट सेल प्रभारी प्रो. एमएस खान ने कहा कि कोरोना से आर्थिक असर पड़ा है।
हाल में विश्वविद्यालय में सेलेक्शन नहीं हुए हैं। जो पूर्व में हुए, उनकी ज्वॉइनिंग नहीं हुई है। कंपनियों ने मना नहीं किया है, इसलिए आश्वस्त हैं कि चयनितों को नौकरी मिलेगी।
भारतीय कंपनियों को नहीं मिल रहे ऑर्डर
एकेटीयू के सेंटर फॉर एडवांस स्टडीज के निदेशक प्रो. मनीष गौड़ ने बताया कि आईटी सेक्टर में अधिकतर काम विदेश से मिलते हैं। कोरोना और बदले आर्थिक परिदृश्य से भारतीय कंपनियों को ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। कई नामी कंपनियों में कोई मांग नहीं है। मैकेनिकल, सिविल और केमिकल के विद्यार्थियों को मौके तो मिलेंगे, लेकिन कम।
इंजीनियरिंग-मैनेजमेंट के स्टूडेंट के लिए जनवरी-फरवरी से मई-जून सेलेक्शन का पीक टाइम होता है। इस साल तो जॉब प्रभावित होंगे। पहले से चयनितों की जॉब बची रहे, ये भी बड़ी बात है।
जनवरी में हुआ था चयन, ज्वॉइनिंग का इंतजार
नोएडा के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र अभिनंदन तिवारी ने बताया कि प्रतिष्ठित कंपनी में जनवरी में उनका चयन हुआ था। 3.70 लाख रुपये का सालाना पैकेज था। अभी ज्वॉइनिंग लेटर नहीं मिला है। कई कंपनियों में पहले से काम कर रहे साथियों की जॉब जा रही हैं या प्रोबेशन पीरियड बढ़ाया जा रहा है। ऐसे में डर है कि ज्वॉइनिंग होगी या नहीं।
राजधानी के प्रतिष्ठित संस्थान से एमटेक कर रहे राहुल निगम का भी चयन बड़ी कंपनी में जनवरी में ही हुआ। 3.60 लाख रुपये का सालाना पैकेज मिला। फाइनल एग्जाम के बाद ज्वॉइनिंग होगी।
राहुल कहते हैं कि कोरोना ने जिस तरह दुनिया की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है, उससे भविष्य को लेकर थोड़ा आशंकित होना स्वाभाविक है। सेलेक्शन न पाने वाले दोस्त चिंतित हैं कि नौकरी मिलेगी या नहीं।
किसी की सैलरी फंसी तो किसी की जॉब गई
कोरोना से उपजे हालात से वे भी प्रभावित हैं, जिन्हें हाल के दिनों में नौकरी मिली है। नोएडा की कंपनी में ट्रेनी सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने बताया कि उसका सालाना आठ लाख का पैकेज था, लेकिन जॉब चली गई। बंगलूरू की कंपनी में जावा डेवलपर का काम कर रहे और चार लाख सालाना का पैकेज पाने वाले अन्य युवा की भी जॉब कोरोना काल में चली गई।
नोएडा की ही एक कंपनी में फरवरी में ज्वॉइनिंग करने वाले युवक ने बताया कि उसकी दो महीने से सैलरी फंसी हुई है। उससे काम लिया जाएगा या नहीं, कंपनी यह भी स्पष्ट नहीं कर रही है।