निकाय चुनाव के भाजपा उम्मीदवारों की सूची के इंतजार में दावेदारों की सांसें अटकी हुई हैं। तमाम दावेदार अपने जिले से लखनऊ के बीच भागदौड़ में जुटे हैं। टिकट के लिए बड़े नेताओं के यहां न सिर्फ दस्तक दे रहे हैं बल्कि तरह-तरह के तर्क देकर खुद को उम्मीदवार बनाने में मदद मांग रहे हें। भाजपा चुनाव समिति की बुधवार को यहां दूसरे दिन की बैठक को मिलाकर अब तक 41 जिलों पर पार्टी नेतृत्व परस्पर चर्चा पूरी कर चुका है।
कई जगह के नगर निगमों के महापौरों, पार्षदों और नगर पालिका परिषद के अध्यक्षों के नाम छांटकर सूची को अंतिम रूप देना शुरू हो गया है। पार्टी नेतृत्व की तरफ से कुछ स्थानों के उम्मीदवारों को चुनाव तैयारियां शुरू करने को हरी झंडी देने की भी खबर हैं। हालांकि अभी तक कोई सूची जारी नहीं की गई है। पर, उम्मीद है कि बृहस्पतिवार को भाजपा एक सूची जारी कर देगी।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेन्द्र पाण्डेय ने बुधवार को यहां प्रदेश चुनाव समिति की दूसरे दिन की बैठक के बाद बताया कि नीचे तक के कार्यकर्ताओं के विचारों को उम्मीदार तय करने में शामिल किया जा रहा है। इसलिए थोड़ा वक्त लग रहा है। एक-दो दिन में उम्मीदवारों की सूची घोषित हो जाएगी। कार्यकर्ताओं को टिकट मिलेगा।
कुछ स्थानों पर उम्मीदवारों के चयन को लेकर खींचतान के बारे में उन्होंने कहा कि अलग राय का मतलब मतभेद नहीं होते। उन्होंने बताया कि काशी, झांसी, वाराणसी, इलाहाबाद और गोरखपुर नगर निगम पर चर्चा पूरी हो गई है। महापौर के उम्मीदवारों को लेकर खींचतान पर कहा कि लखनऊ या इलाहाबाद में विवाद की स्थिति नहीं है। विधायक और सांसद की राय को मतभेद के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।
95 प्रतिशत टिकट कार्यकर्ताओं को
डेमो
- फोटो : डेमो
भाजपा चुनाव समिति ने बुधवार को यहां कानपुर और बुंदेलखंड के बारे में चर्चा की। इस प्रकार पार्टी अब तक तीन क्षेत्रों काशी, गोरखपुर और कानपुर-बुंदेलखंड की चर्चा पूरी कर चुकी है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. पाण्डेय ने सहयोगी दलों से मतभेद की बातों से इनकार किया है। कहा कि सहयोगी दलों का कार्यक्षेत्र ग्रामीण इलाकों में ज्यादा है।
पर, कहीं से अगर उचित आग्रह क्षेत्र केजरिये आ रहा है, उनकी जीत की संभावना दिख रही है तो उस पर विचार कर रहे हैं। राजभर के अपने दम पर चुनाव लड़ने के एलान पर पूछे गए सवाल पर डॉ. पाण्डेय ने कहा कि अपनी पार्टी के बारे में निर्णय लेने का उन्हें अधिकार है।
राजभर की बात पर उचित मंच पर चर्चा हुई है। जिस क्षेत्र को लेकर उनकी टिकट की मांग आई है। वहां की भाजपा की टीम को राजभर की पार्टी भारतीय समाज पार्टी (भासपा) से बात कर जिताऊ और स्वीकार्य प्रत्याशी होने पर उसके बारे में विचार करने को कहा गया है।
विधायकों और सांसदों के अपने लोगों को टिकट दिलाने से कार्यकर्ताओं में फैल रही नाराजगी पर प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि चयन में धरातल पर काम करने वाले कार्यकर्ता को ही प्राथमिकता दी जा रही है। जीत की संभावना की रिपोर्ट लेकर प्रत्याशी चयन में आगे बढ़ रहे हैं। सामाजिक समीकरण, स्थानीय रिपोर्ट और पार्टी में योगदान, छवि तथा क्षमता को आधार बनाकर निर्णय कर रहे हैं।
लिस्ट जारी होगी तो पता चलेगा कि पार्टी ने 95 प्रतिशत टिकट कार्यकर्ताओं को ही दिए हैं। उन्होंने दावा किया कि मोदी और योगी सरकार की योजनाओं के लाभ से जनता में भाजपा के पक्ष में माहौल है जनता जानती है कि निकाय चुनाव में भी भाजपा उम्मीदवारों को ही जिताने से उनके क्षेत्र का विकास होगा।