मूर्तियों की पेंटिंग के लिए छह एयर कंप्रेसर (50 लीटर क्षमता वाले) स्प्रे मशीन, पेंटिंग व्हील आदि का वितरण भी करने के निर्देश दिए गए हैं। माटीकला बोर्ड के अधिकारियों को मिट्टी कारीगरों की मांग के हिसाब से दीया निर्माण को गति प्रदान करने के भी निर्देश दिए गए हैं। परंपरागत करीगरों को दीया बनाने वाली मशीन (डाई सहित) वितरित की जा रही है।
सिद्धार्थनाथ ने बताया कि प्रदेश में परंपरागत रूप से लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां बनाने वाले समूहों को चिह्नित कर उन्हें कार्यस्थल पर उप्र डिजाइन संस्थान से एप्रूव्ड योग्य कलाकारों के माध्यम से प्रशिक्षण देने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।