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लोन न मिलने से रुक सकता है मेट्रो का काम, देखिए और डिटेल

Fri, 02 Sep 2016 04:17 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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डेमो - फोटो : amar ujala
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यूरोपियन यूनियन बैंक से मिलने वाले 3502 करोड़ रुपये का लोन लखनऊ मेट्रो के लिए संजीवनी के समान समझा जा रहा है। मुश्किल तो यह है कि इस ऋण की 750 करोड़ रुपये की पहली किस्त ही अभी तक नहीं जारी हुई।
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एलएमआरसी के लिए यह बजट मेट्रो के कोच खरीदने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए जरूरी है। अगर यह लोन नहीं मिला तो मार्च में शुरू होने वाला मेट्रो का कॉमर्शियल संचालन अटक सकता है। 

बृहस्पतिवार को प्रेसवार्ता में यह जानकारी एलएमआरसी के एमडी कुमार केशव ने दी। एमडी ने बताया कि ईआईबी से मिलने वाला लोन नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर पर आने वाले 6928 करोड़ रुपये के खर्च का अहम हिस्सा है। 
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पहली किस्त जारी होने का ही इंतजार है, इसके बाद बाकी की रकम मिलने में दिक्कत नहीं आएगी। एमडी ने कहा कि यह लोन लेकिन हमें केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के माध्यम से मिलना है। 

हम मंत्रालय के अधिकारियों के लगातार संपर्क में हैं, जिससे पहली किस्त जल्दी मिल सके। एमडी ने बताया कि फ्रांस की कंपनी अलस्टॉम को नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर के लिए 80 कोच की आपूर्ति करनी है।

इसके लिए 1069.81 करोड़ रुपये का भुगतान एलएमआरसी को करना होगा। ऐसे में यूरोपियन यूनियन से मिले वाली रकम की ज्यादा जरूरत है। उन्होंने बताया कि पहली फिलहाल अक्तूबर तक पहली किस्त मिलने की बात कही गई है। 

श्रीसिटी चेन्नई से लौटे एमडी कुमार केशव का कहना है कि अलस्टॉम अभी 30 नवंबर तक कोच की आपूर्ति करने की बात कह रही है। एक दिसंबर से अगर हमें ट्रायल शुरू करना है।

कोच के ब्रेक भी होंगे खास

एलएमआरसी के एमडी व अन्य अफसर - फोटो : amar ujala
इसके लिए करीब 15 दिन पहले हमें कोच चाहिए। इन 15 दिनों में टेस्टिंग हमारी इंजीनियर्स की टीम करेगी। इसके बाद ही डिपो के अंदर ट्रायल शुरू किया जा सकेगा। हम अब कोशिश में हैं कि अलस्टॉम हमें 16 नवंबर तक मेट्रो कोच की आपूर्ति कर दे।

कुमार केशव ने बताया कि भूमिगत रूट पर सचिवालय पर टनल बोरिंग मशीन उतारने के लिए जरूरी 20 में से चार पैनल डायफ्रॉम वॉल बनाने के लिए पूरे कर लिए गए हैं। एक पैनल को लगाने में चार दिन का समय लगता है। 

अगले दो महीने में यहां सुरंग की खोदाई शुरू कराई जा सकती है। वहीं हुसैनगंज स्टेशन पर डायफ्रॉम वॉल का काम 15 सितंबर से शुरू हो जाएगा। हजरतगंज में भी डायफ्रॉम वाल बनाने का काम शुरू करने के लिए गाइड वॉल का निर्माण शुरू करा दिया गया है।

लखनऊ मेट्रो के लिए बन रहे कोच के ब्रेक भी खास बनाए जा रहे हैं। जहां पहली बार देश में डिस्क ब्रेक किसी मेट्रो कोच में लगाए जा रहे हैं। वहीं ब्रेक से कुल बिजली खर्च की 35 प्रतिशत बिजली दोबारा पैदा हो जाएगी। 

डिस्क ब्रेक का फायदा जहां ट्रेन को अचानक से रोकने में मदद करेगा। वहीं कोच का पहिया भी शू-ब्रेक की तुलना में तेजी से नहीं घिसेगा।
 
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ट्रेन की अधिकतम स्पीड होगी 75 किमी प्रतिघंटा

स्टील का पुल - फोटो : amar ujala
कोच में ट्रेन ऑपरेटर से लाइव टॉक करने के लिए टॉक-बैक सुविधा से लेकर दूसरे सभी फीचर्स पूरे कोच से यात्रियों को दिखाई देंगे। वहीं दिल्ली मेट्रो से अलग इस बार पैसेंजर्स के लिए सूचना एलईडी की जगह एलसीडी पर दिखाई जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि एलसीडी पर सूचना अधिक साफ तरीके से लोगों को नजर आएगी। निदेशक रॉलिंग स्टॉक महेंद्र कुमार ने बताया एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन के बीच मेट्रो 35 किमी प्रतिघंटा की औसत गति से दौडे़गी।

इसका आकलन कर लिया गया है। ट्रेन की अधिकतम स्पीड 75 किमी प्रतिघंटा तक होगी। ट्रायल शुरू करने के लिए मवैया तक लखनऊ मेट्रो ट्रेक बेड का काम पूरा कर चुका है। इसके उलट अभी 16 में 10 किमी पटरी ही बिछ सकी है। 

6.5 किमी लंबे ट्रांसपोर्टनगर से मवैया के बीच रूट पर अब इस काम को तेज करने के लिए कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए गए हैं। बिजली और दूसरे काम भी अक्तूबर तक यहां खत्म होने हैं।

लखनऊ मेट्रो का स्मार्ट कार्ड खरीदने के लिए न्यूनतम 200 रुपये चुकाने होंगे। इसके बाद 100 रुपये न्यूनतम से इसे रिचार्ज किया जा सकेगा।

पहले चरण में लखनऊ मेट्रो को 50,000 स्मार्ट कार्ड की खेप बिक्री के लिए चेकोस्लोवाकिया की कं पनी देगी। यही कंपनी ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन पर भी काम कर रही है।
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