चंद्रहास मिश्रा अपने पिता की दुकान पर बैठे थे, उनके मकान मालिक का लड़का वहां आकर लड़कियों से छेड़छाड़ करने लगा। चंद्रहास ने मना किया तो वह उन्हें ‘किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ने’ की धमकी देकर चला गया।
दो दिन बाद वो एक बाल्टी में पांच लीटर एसिड लेकर आया और उन पर डाल दिया। उनका शरीर बुरी तरह जल गया। पुलिस ने केस दर्ज किया आरोपी जेल गया। लेकिन छह महीने बाद हाईकोर्ट से उसे जमानत मिल गयी।
चंद्रहास आज भी केस लड़ रहे हैं, उन्हें सरकार ने अब तक काई मदद नहीं दी है। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी है, कहते हैं कि सिर्फ महिलाएं ही एसिड अटैक की शिकार नहीं होती, 30 प्रतिशत पुरुष भी इसके शिकार हैं।
प्रदेश सरकार सिर्फ महिलाओं को मदद देकर भेदभाव कर रही है। एक होटल में बृहस्पतिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में चंद्रहास ने अपने संघर्ष को इन शब्दों में व्यक्त किया। उनके साथ मेरठ से 11 और एसिड अटैक पीड़ित पुरुष भी जुड़ चुके हैं।
लोगों को नहीं मिल रहा न्याय और सरकारी सहायता
एसिड सर्वाइवर्स कार्यक्रम में सीईओ राहुल वर्मा
- फोटो : amar ujala
इसके अलावा 19 महिलाएं और लड़कियां भी हैं जिन पर एसिड अटैक हुआ लेकिन उन्हें अब तक न्याय और सरकारी सहायता नहीं मिली।
कार्यक्रम का आयोजन एसिड सर्वाइवर्स फाउंडेशन इंडिया द्वारा किया गया था जिसमें फाउंडेशन के राष्ट्रीय निदेशक व सीईओ राहुल वर्मा मौजूद थे।
कार्यक्रम में मेरठ की ही एक और पीड़िता मंजू भी मौजूद थी। उन्होंने बताया कि उनके पति ने उन पर एसिड फेंक कर आधा चेहरा जला दिया था। इस घटना को नौ वर्ष हो चुके हैं, लेकिन उन्हें कहीं से कोई सहायता नहीं मिली।
इलाज के लिए पैसे न होने पर उनके ससुराल पक्ष ने उन्हें पति से समझौता करने के लिए कहा था जिसके एवज में वे उनका इलाज करवाने को तैयार थे।
मुफलिसी से गुजर रहीं कम पढ़ी लिखी मंजू इसके लिए राजी हो गई। समझौता हुआ, साढ़े तीन साल बाद पति जेल से रिहा हो गया लेकिन, बाद में सुसराल वाले अपने वादे से पलट गए। उन्हें आज भी दर-दर भटकना पड़ रहा है।