मेट्रो के नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर के निर्माण पर करीब 6800 करोड़ रुपये खर्च होंगे लेकिन लखनऊ मेट्रो सेल कॉर्पोरेशन (एलएमआरसी) की झोली में अभी सिर्फ 55 करोड़ ही हैं।
पहले फेज में होने वाले नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर के सात किमी निर्माण पर करीब 300 करोड़ रुपये खर्च होंगे। एलएमआरसी के अधिकारी जुलाई से पहले फेज का निर्माण शुरू करने की बात कर रहे हैं।
लेकिन बिना पैसा काम कैसे शुरू होगा इसका जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है। क्योंकि अभी न तो बैंक से कर्ज मंजूर हुआ है और न ही प्रदेश सरकार से मिलने वाले 500 करोड़ मिल पाए हैं।
ऐसे में एलएमआरसी की मेट्रो केवल उम्मीदों के सहारे ही चल रही है। मेट्रो के निर्माण पर कुल 12,571 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें 20 प्रतिशत केंद्र सरकार, 20 प्रतिशत राज्य सरकार और 60 प्रतिशत राशि बैंक से लोन लेकर जुटाई जाएगी।
शहर में मेट्रो के दो कॉरिडोर बनेंगे। इनमें एक ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर और दूसरा नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर है। हाल ही में केंद्र सरकार ने मेट्रो के नार्थ-साउथ कॉरिडोर (अमौसी से मुंशी पुलिया) के निर्माण की मंजूरी दी है।
इस पर करीब 6800 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। बीते माह आचार संहिता लागू होने से पहले मुख्यमंत्री मेट्रो परियोजना का शिलान्यास भी कर चुके हैं।
मेट्रो के लिए 60 प्रतिशत धन बैंक लोन के जरिए जुटाया जाना है। मगर अब तक किसी बैंक से इसको लेकर करार नहीं हो पाया है। इस समय फ्रेंच बैंक एएफडी से एलएमआरसी की बातचीत चल रही है।
इससे पहले जापनी बैंक जाइका और विश्व बैंक से भी एलएमआरसी लोन के लिए प्रयास कर चुकी है लेकिन अब तक किसी बैंक ने लोन देने की हामी नहीं भरी है।
वैसे फ्रेंच बैंक से लोन मिलने को लेकर एलएमआरसी के अधिकारी काफी आशान्वित हैं। एलएमआरसी के एमडी राजीव अग्रवाल का कहना है फ्रेंच बैंक से लोन मिलने की काफी उम्मीद है।
बैंक के अधिकारी मेट्रो रूट का दौरा कर चुके हैं। वहीं केंद्रीय वित्त मंत्रालय के साथ ही बैंक के प्रतिनिधियों की बैठक हो गई है।
सब कुछ ठीक ठाक चले तब भी विदेशी बैंक एएफडी से कर्ज लेने में एलएमआरसी को करीब एक साल का समय लग जाएगा। एलएमआरसी के एमडी राजीव अग्रवाल के मुताबिक लोन की प्रक्रिया काफी लंबी होती है।
विदेशी बैंक से कर्ज के लिए केंद्र सरकार की अनुमति जरूरी होती है। राजीव के मुताबिक कोच्चि में फ्रेंच बैंक एएफडी ने ही लोन दिया है।
वहां पर लोन की प्रक्रिया काफी तेजी से चली। उसके बाद भी करीब एक साल लग गया। ऐसे में यहां भी करीब एक साल का समय लगने की उम्मीद है।