पेशे से ड्राइवर अजय की माली हालत अच्छी नहीं है। बीमारी की वजह से परिवार आर्थिक रूप से तबाह हो चुका है। बेटे ने बताया कि सालभर पहले अजय को पेट संबंधी दिक्कतें हुई थीं। वे दिल्ली चले गए। पता चला कि लिवर कैंसरग्रस्त हो चुका है। इसके बाद वह केजीएमयू पहुंचे। यहां भर्ती करने के बाद शुक्रवार को लिवर ट्रांसप्लांट किया गया।
केजीएमयू प्रशासन भी कर चुका है खर्च का दावा
केजीएमयू प्रशासन भी खर्चे की बात स्वीकार कर रहा है। शुक्रवार को ट्रांसप्लांट के बाद जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि ट्रांसप्लांट में करीब सात से आठ लाख रुपये खर्च आने का अनुमान है। यही ट्रांसप्लांट निजी अस्पताल में होता तो करीब दस गुना अधिक खर्च होता।
रुपये खर्च हुए हैं तो लौटाए जाएंगे
मामले पर केजीएमयू के सीएमएस प्रो. एसएन शंखवार का कहना है कि असाध्य रोगी का मुफ्त में इलाज किया जाता है। इस मरीज के लिवर ट्रांसप्लांट के लिए दवाएं और उपकरण उपलब्ध कराए गए थे। रुपये जमा कराने के बारे में जानकारी नहीं है। यह संभव है कि परिवारीजन भर्ती होने से पहले हुए खर्च के बारे में जानकारी दे रहे हों। फिर भी सच्चाई पता कराया जाएगा। रुपये खर्च हुए हैं तो उसके बारे में नियम को समझा जाएगा और मरीज के परिवारीजनों को रुपये वापस कराने का प्रयास किया जाएगा।