सोमवार को भी तय शेड्यूल के मुताबिक टीमें यहां पर पहुंचीं और लोगों को जांच के लिए बुलाया, लेकिन लोगों को घरों से निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। अधिकारियों का कहना है कि इलाके के लोग सहयोग नहीं करेंगे तो समस्या यूं ही बनी रहेगी।
कसाईबाड़ा इलाके में छुट्टा जानवर संक्रमण बढ़ाने का जरिया बन सकते हैं। यहां गोवंश के साथ कुत्ते भी इधर-उधर घूमते रहते हैं। बैरिकेडिंग के दूसरी ओर कसाईबाड़ा में भी ये मवेशी दिनभर आते-जाते रहते हैं और छावनी के अन्य इलाकों में भी चले जाते हैं। पुलिस वालों ने बताया कि दिनभर इन मवेशियों को भगाना पड़ता है।
कसाईबाड़ा इलाके में जो पुलिसकर्मी ड्यूटी कर रहे हैं, उन्हें भी संक्रमण का डर सता रहा है। इलाके को बैरिकेड किया गया है, फिर भी उन्हें संक्रमित होने की आशंका है।
एक पुलिसकर्मी ने कहा कि हमारा भी परिवार है। इलाकाई लोग जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। ऐसे में संक्रमण का खतरा बना हुआ है। छावनी के संभ्रांत लोगों का कहना है कि लोग सहयोग करें तो महामारी से आसानी से छुटकारा मिल सकता है।
व्यापारी संजय दयाल ने कहा कि पुलिस-प्रशासन का रवैया सराहनीय है। लोगों को मामले की गंभीरता समझ होनी चाहिए और जांच के लिए खुद आगे आना चाहिए।
कोरोना संक्रमण में अतिसंवेदनशील सदर इलाके में हर घर से दो नमूने लेकर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। सोमवार को 80 सैंपल लिए गए। कोरोना के नोडल अधिकारी डॉ. केपी त्रिपाठी ने बताया कि कोरोना को लेकर चिह्नित हॉटस्पॉट इलाके सदर में विभाग द्वारा विशेष अभियान शुरू किया गया है।
सैंपल कलेक्शन टीम द्वारा कोरोना संक्रमित मरीज के घर के 100 मीटर के दायरे में हर घर से दो लोगों की कोरोना जांच के लिए सैंपल लिए जा रहे हैं। टीम इस बात की जानकारी भी जुटा रही है कि वहां रहने वालों की उम्र कितनी है। परिवार में कितने महिला, पुरुष और बच्चे, बुजुर्ग हैं।