जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम न्यायालय के बाहर बैठक अधिवक्ता।
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लखनऊ। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम में अध्यक्ष का पद डेढ़ माह से ज्यादा समय से खाली है। पूर्व अध्यक्ष के यहां से जाने के बाद से फिलहाल किसी की नियुक्ति नहीं हो सकी है। ऐसे में वादकारियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। वादों की सुनवाई या निपटारे की जगह उन्हें सिर्फ तारीखें ही मिल रही हैं। इस संबंध में अधिवक्ताओं का कहना है कि कोर्ट के न बैठने से नए वादों की स्वीकृति भी नहीं हो पा रही है।
उपभोक्ता मामलों के अधिवक्ता यशवर्धन ने बताया कि जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम के अध्यक्ष के पद पर नीलकंठ सहाय सुनवाई कर रहे थे। सितंबर के आखिरी सप्ताह में उनके जाने के बाद से यहां किसी की नियुक्ति नहीं हो सकी है। अधिवक्ता राजेश गुप्ता ने बताया कि आयोग-प्रथम में पहले से ही पांच हजार से ज्यादा मामले लंबित हैं। अब कोर्ट में सुनवाई ठप हो जाने से वादों की संख्या और बढ़ जाएगी। पूर्व अध्यक्ष का जीएसटी अपीलीय कोर्ट के लिए चयन हो जाने पर उनकी यहां से विदाई हो चुकी है। यहां नए अध्यक्ष की नियुक्ति के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं, क्योंकि इसकी प्रक्रिया में काफी समय लगता है।
प्रवीण कुमार विश्वकर्मा, राजेश सिंह और अतुल कीर्ति समेत अन्य अधिवक्ताओं का कहना है कि अगर किसी अन्य जिले के अध्यक्ष को यहां अटैच कर दिया जाए तो भी धीरे-धीरे ही सही, लेकिन कामकाज चलता रहेगा। उन्होंने बताया कि जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम और द्वितीय न्यायालय हैं। एक माह में एक न्यायालय तो अगले माह में दूसरे न्यायालय में वाद दायर किए जाने की प्रक्रिया है। नवंबर में प्रथम अदालत में वाद दायर होने थे तो दिसंबर में द्वितीय में होंगे। अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रथम न्यायालय में किसी अध्यक्ष के न होने से उपभोक्ता भी अब दिसंबर का इंतजार कर रहे हैं, ताकि जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-द्वितीय में वाद दायर कर सकें।