अवध की तीन सदियों के हर मौसम को, हर लम्हे को बेहद करीब से देखा है मैंने। इल्म की रोशनी से नहाया हूं मैं। यहां की रिवायतों को, संगीत, किताबों और बड़ी-बड़ी शख्सियतों को करीब से महसूस किया है मैंने। अंग्रेजों का शासन और अनुशासन देखा है, नवाबों के ठाठ-बाट देखे हैं। देखा है देश की आजादी के पहले सूरज से लेकर सजते-संवरते लखनऊ को। अब तकनीक के दम पर आधुनिक होते लखनऊ को भी करीब से देख रहा हूं मैं। गौर से सुनो, मैं लखनऊ विश्वविद्यालय बोल रहा हूं...
1864 में लखनऊ के हुसैनाबाद में एक कमरे में मेरा जन्म हुआ। तब मेरा नाम कैनिंग कॉलेज था। शिक्षा के इस छोटे से मंदिर ने लंबा सफर किया। 1920 में मुझे विश्वविद्यालय का दर्जा हासिल हुआ। आज मेरी पहुंच पांच जनपदों तक है। 571 महाविद्यालय मुझसे संबद्ध हैं। 2020 में मैं शतायु हुआ तो सरकार ने मुझे चार जिलों में कॉलेजों को सहयुक्तता के अधिकार से नवाज दिया। आज 104 वर्ष की उम्र में मेरे नाम अनगिनत उपलब्धियां दर्ज हैं। मुझे खुद पर गर्व है कि मेरे पास से इल्म की रोशनी लेकर निकले विद्यार्थी आज पूरी दुनिया में मेरा नाम रोशन कर रहे हैं। गौर से सुनो, मैं लखनऊ विश्वविद्यालय बोल रहा हूं...
अंग्रेज गवर्नर की याद में पड़ी नींव, अवध के तालुकेदारों ने चंदे से बनवाया था विवि
आयुष तिवारी
लखनऊ। लखनऊ विवि की नींव अंग्रेज गवर्नर लार्ड कैनिंग की स्मृति पड़ी। इसे अवध के तालुकेदारों ने चंदा लगाकर आगे बढ़ाया। तत्कालीन संयुक्त प्रांत गवर्नर सर हरकोर्ट बटलर एवं राजा महमूदाबाद ने मूर्त रूप देने में विशेष भूमिका निभाई।
कैनिंग कॉलेज के नाम से शुरू शिक्षा का यह मंदिर 1887 तक कलकत्ता विवि से संबद्ध रहा। 1888 में इसे इलाहाबाद विवि से संबद्ध कर दिया गया। 1905 में अंग्रेज सरकार की अनुमति के बाद यह बादशाह बाग के नाम से मशहूर मूल परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया। 25 नवंबर 1920 को कैनिंग कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया और 1921 से पढ़ाई की शुरूआत हुई। विवि का दर्जा मिलने के बाद सबसे पहले मेडिकल कॉलेज (केजीएमयू) को इससे संबद्ध किया गया। वहीं 1870 में स्थापित आईटी गर्ल्स कॉलेज को इसका पहला असोसिएट कॉलेज बनाया गया।
104वें वर्ष में लविवि के हिस्से की चार बड़ी उपलब्धियां
1- लखनऊ विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति (एनईपी 2020) को लागू करने वाला देश का पहला संस्थान बना।
2- 2020 से अब तक खाली पदों के सापेक्ष 149 नियमित और 113 संविदा पदों पर शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को पूरा करना।
3- नैक मूल्यांकन ए डबल प्लस ग्रेड, यूजीसी की कैटेगरी वन और एनआईआरएफ रैंकिंग में 32वां स्थान हासिल करने वाला राज्य का पहला संस्थान।
4- उत्तर प्रदेश में सबसे पहले डिस्टेंस एजुकेशन, ऑनलाइन कोर्स शुरू करने वाला पहला संस्थान। वर्तमान में यहां यूजी और पीजी के 10 पाठ्यक्रम ऑनलाइन कोर्स के तौर पढ़ाए जा रहे हैं।
चार प्रधानमंत्री छात्रसंघ के आजीवन मानद सदस्यों में शामिल
लखनऊ विश्वविद्यालय में वैसे तो 2006 के बाद कोई भी छात्र संघ चुनाव नहीं हुआ लेकिन यहां पर छात्रसंघ की अजीवन मानद सदस्यता में नामी राजनेता शामिल रहे। इसमें से चार तो प्रधानमंत्री ही हैं जिसमें पं. जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, लालबहादुर शास्त्री और मोरारजी देसाई का नाम शामिल हैं। इसके साथ ही सीमांत गांधी के नाम से जाने जाने वाले खान अब्दुल गफ्फार खान का नाम भी इस फेहरिस्त में है। इन सभी के सहमति पत्र लविवि की धरोहर के तौर पर संरक्षित हैं।
अवध के नवाब का निवास हुआ करता था वर्तमान परिसर
लखनऊ विश्वविद्यालय का वर्तमान परिसर जो कभी बादशाह बाग के नाम से जाना जाता था। यह अवध के नवाब नसीरुद्दीन हैदर का आवास हुआ करता था। यहां की लाल बारादरी जो अब अपने अंतिम दिन गिन रही है, सबसे पुरानी और खूबसूरत इमारतों में से एक रही है।