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खौफनाक मंजर: 3 मिनट में आकर लौट गई मौत

Fri, 27 Sep 2013 01:53 AM IST
अभिषेक यादव/लखनऊ
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गोमती नगर स्थित नाबार्ड के उत्तर प्रदेश कार्यालय की लिफ्ट गुरुवार सुबह टूट गई।
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घटना से लिफ्ट में सवार 12 लोगों को गंभीर चोटें आई हैं, जिनमें से अधिकतर के घुटनों, टखनों और पैर के अन्य हिस्सों की हड्डियां टूट गई हैं।

इन सभी को एंबुलेंस से एक निजी अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया, जहां सभी को भर्ती करवाया गया है। दूसरी लिफ्ट टूटने की वजह इसके कंट्रोल पैनल में हुआ शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है।

इस हादसे में घायल होने वालों में 11 लोग राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास (नाबार्ड) उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय कार्यालय भवन में वायदा बाजार पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में शामिल होने आए थे।
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वहीं एक अन्य व्यक्ति नाबार्ड के जिला कृषि विकास प्रबंधक डीआर सिंह भी लिफ्ट में थे। कार्यशाला के पहले दिन नाबार्ड भवन की पांचवीं मंजिल पर स्थित सभागार में पहुंचने के लिए सुबह करीब 10 बजे सभी 12 लोग लिफ्ट में चढ़े।

पांचवीं मंजिल पर पहुंच कर लिफ्ट नहीं खुली। इस पर डीके सिंह ने ने लिफ्ट के कंट्रोल पैनल के बटन दबाए, इससे शॉर्ट सर्किट व धमाका हुआ और उसमें आग निकलने लगी। लिफ्ट भी तेजी से नीचे आ गिरी।

पांचवीं मंजिल अनियंत्रित हुई लिफ्ट ने इतने झटके खाए कि लोगों के पैरों की हड्डियां टूट गई। पूरे नाबार्ड कार्यालय में चीखपुकार मच गई। लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू हुआ।

लखीपुर खीरी के कारर्पोरेटिव सोसायटी के सचिव अशोक कुमार दीक्षित ने बताया कि महज तीन मिनट में मौत सिर पर मंडराकर लौट गई। वह कहते हैं कि लिफ्ट के पांचवे तल पर फंसते ही कई लोगों ने अनहोनी की आशंका जता दी थी। लिफ्ट गिरने के बाद उसमें कई सदस्य बेहोश हो गए थे।

तत्काल एंबुलेंस बुलवाई गई और उन्हें गोमतीनगर स्थित पत्रकारपुरम के एक निजी अस्पताल में पहुंचाया गया। यहां सभी का एक्सरे करवाने के चिकित्सकों ने उनकी हड्डियां टूटी पाईं और प्लास्टर चढ़वाए गए।

घटना छिपाते रहे नाबार्ड अधिकारी
सुबह 10 बजे हुए हादसे की जानकारी नाबार्ड के अधिकारियों ने पुलिस तक को नहीं। पीड़ितों को अस्पताल पहुंचाने के बाद कार्यालय से अधिकतर अधिकारी भी गायब हो गए।

दोपहर करीब डेढ़ बजे पुलिस अधिकारी शेषनाथ सिंह यादव अपनी टीम के साथ कार्यालय पहुंचे तो गार्ड ने उन्हें भी नाबार्ड कार्यालय में प्रवेश नहीं करने दिया।

इस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई, मामला बिगड़ता देख नाबार्ड में मैनेजर व सुरक्षा प्रोटोकॉल अधिकारी अजीत श्रीवास्तव ने उन्हें पूरी जानकारी दी। साथ ही कहा कि हादसे में कुछ ही लोगों को हल्की चोटें आई हैं। वे स्पष्ट नहीं कर पाए कि लिफ्ट क्यों टूटी।
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मेयो अस्पताल में भी बदइंतजामी
इस बीच मेयो अस्पताल पहुंचे पीड़ितों को इलाज के दौरान अलग अलग वार्ड में कई बार शिफ्ट किया गया। किसी को स्ट्रेचर पर जनरल वार्ड में लाया गया तो मालूम हुआ कि यहां जगह नहीं है, उन्हें दूसरे वार्ड में ले जाना पड़ा।

दूसरी ओर कई परेशान लोग जो अपनी घायल परिजनों की तीमारदारी के लिए आए थे, उन्हें भी बाहर धकिया दिया गया।
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