बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि मुसलमान तो कह ही रहा है कि कोर्ट का फैसला मानेंगे, कोर्ट देर कर रहा है। हमने जल्द सुनवाई की मांग को लेकर हिंदू पक्षकार के साथ मिलकर राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया है। यौमे गम यदि मुसलमान मनाते हैं तो शौर्य दिवस मनाने वालों से पूछा जाना चाहिए कि वे कब तक मनाएंगे। वो शौर्य दिवस मनाना बंद कर दें तो हम भी बंद कर देंगे। कहा कि मैं न यौमे गम में शामिल हूं, न ही शौर्य दिवस में। यह तो नेताओं की परंपरा है। हमारी एक ही मांग यह झगड़ा खत्म होना चाहिए। इकबाल ने कहा कि 1990,1992 में भीड़ बढ़ी तो नुकसान हुआ, लेकिन 25 दिसंबर की भीड़ से कोई नुकसान नहीं हुआ, यह सरकार की व्यवस्था का नतीजा था।
बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी महबूब के घर पर यौमे गम को लेकर कार्यक्रम चल रहा था। बाबरी मस्जिद शहीद करने वालों के खिलाफ जोशीली तकरीरें हो रहीं थीं। लोग गम और गुस्सा जता रहे थे। इसी बीच हाजी महबूब ने कमरे के अंदर आकर बात शुरू की। कहा कि बाबरी मस्जिद को शहीद करने वाले लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमाभारती को सजा दिलवाकर रहूंगा। सीबीआई केस वापस लेने की तैयारी में थी लेकिन मेरी रिट पर सुनवाई चल रही है। मैंने आडवाणी को राष्ट्रपति नहीं बनने दिया। कहा कि सुप्रीम कोर्ट ही मंदिर-मस्जिद विवाद निपटाने का अंतिम जरिया दिख रही है। हम चाहते हैं कि सुलह-समझौते की ईमानदारी से कोशिश हो। तमाम लोग इस मकसद से आते हैं लेकिन श्री श्री की कोशिश ही ईमानदार दिखती है। अयोध्या के मुसलमान नहीं चाहते कि राममंदिर न बने।
अयोध्या में सुबह सात बजे अचानक पुलिस की बंदिशों ने माहौल तल्ख कर दिया। मुख्य मार्गों पर बैरियर लगाकर वाहनों का प्रवेश रोक दिया गया। इसका असर दर्शन-पूजन से लेकर स्कूल-कॉलेज, समेत हर चीज पर पड़ा। लोगों का गुस्सा बढ़ने लगा तो एसपी सिटी अनिल सिंह सिसोदिया ने पहुंचकर मोहबरा मार्ग खुलवाया। हालांकि दिन ढलते ही हालात सामान्य हो गए।