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Lucknow News: पालतू कुत्तों से जुड़ी दुकानों, क्लीनिक और ब्रीडिंग सेंटर वालों के लिए लाइसेंस अनिवार्य

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लखनऊ। पालतू कुत्तों का सामान बेचने वाली दुकानों, इलाज करने वाली क्लीनिक और ब्रीडिंग सेंटर अब बिना लाइसेंस शहर में नहीं चलेंगे। इसके लिए नगर निगम से लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए नगर निगम की ओर से आदेश जारी कर दिया गया है। लाइसेंस एक साल के लिए होगा और हर साल उसका नवीनीकरण कराना होगा, जिसकी फीस भी तय कर दी गई है।
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करीब दो साल पहले नगर निगम ने यह प्रस्ताव तैयार किया था। जिसे पहले नगर निगम कार्यकारिणी और फिर सदन में मंजूरी के लिए लाया गया। विधिक प्रक्रिया पूरी करने होने के बाद नगर निगम ने अब लाइसेंस की यह नई व्यवस्था लागू कर दी है। अभी तक नगर निगम सिर्फ कुत्ता पालने के लिए ही लाइसेंस जारी करता है, लेकिन अब इनका सामान बेचने वाले, इलाज करने वाले क्लीनिक और ब्रीडिंग सेंटर व क्रेच का भी लाइसेंस जारी करेगा।

जो यह व्यवसाय करेंगे, उनके लिए नगर निगम से लाइसेंस लेना अनिवार्य हो गया है। इनमें पेट शॉप और ब्रीडिंग सेंटर का लाइसेंस उन्हीं को जारी किया जाएगा, जिनके पास जीव-जंतु कल्याण बोर्ड का पंजीकरण प्रमाण पत्र होगा। लाइसेंस के बारे में जानकारी के लिए निगम के कर्मचारी जयंत से मोबाइल नंबर 9511156792 पर संपर्क किया जा सकता है।
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शहर में 1,000 से अधिक पेट शॉप और क्लीनिक

नगर निगम के पशुकल्याण अधिकारी डाॅ. अभिनव वर्मा का कहना है कि शहर में करीब 1000 पेट शॉप और क्लीनिक हैं। इसी तरह जीव जंतु कल्याण बोर्ड से आठ ब्रीडिंग सेंटर पंजीकृत हैं। कई बार यह शिकायत भी आती है किकुछ ब्रीडिंग सेंटर अवैध रूप से चल रहे हैं। लाइसेंस जारी होने से यह पता रहेगा कि शहर में कितने ब्रीडिंग सेंटर हैं। ऐसे में नियमों के तहत सेंटर चलाने के लिए बाध्य भी किया जा सकेगा।



नगर निगम ने तय किया है ये लाइसेंस शुल्क

- पेट क्लीनिक (केवल पालतू पशु उपचार के लिए) - 5000 रुपये

- पेट ब्रीडिंग सेंटर (अधिकतम तीन ब्रीड के लिए) - 10,000 रुपये

- पेट ब्रीडिंग सेंटर (अधिकतम पांच ब्रीड के लिए) - 15,000 रुपये

- पेट शॉप - 10,000 रुपये

- वेटनरी डायग्नोस्टिक सेंटर - 10,000 रुपये

- पेट क्रेच- 10,000 रुपये



यह व्यवस्था पहली बार लागू की गई है। इसलिए एक महीने का समय दिया गया है कि प्रतिष्ठान मालिक दिए गए समय में लाइसेंस बनवा लें। उसके बाद नगर निगम जांच कर जुर्माने की कार्रवाई शुरू करेगा।
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- डाॅ. अभिनव वर्मा, पशु कल्याण अधिकारी, नगर निगम
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