लखनऊ। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा है कि सड़क हादसों और अन्य चिकित्सीय आपातकालीन स्थितियों को देखते हुए हर मंडल में लेवल वन स्तर का ट्रॉमा सेंटर होना चाहिए। इससे केजीएमयू में स्थित एकमात्र लेवल वन ट्रॉमा सेंटर पर दबाव कम होगा। उपमुख्यमंत्री मंगलवार को चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से केजीएमयू के अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित सीएमई में बोल रहे थे।
सीएमई में सड़क हादसों और अन्य चिकित्सीय आपातकालीन स्थितियों में बेहतर इलाज व्यवस्था पर मंथन किया गया। इसके आधार पर प्रदेश स्तरीय नीति बनाई जाएगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सभी चिकित्सा संस्थानों में इमरजेंसी मेडिसिन विभाग भी खोला जाना चाहिए। सभी डॉक्टरों को वेंटिलेटर के संचालन में भी बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। इससे इमरजेंसी की स्थिति बेहतर होगी। एमबीबीएस चिकित्सकों को छह महीने का इमरजेंसी डिप्लोमा कराया जाना चाहिए। इससे आपातकालीन सेवाओं के लिए प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता बढ़ेगी।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने डॉक्टरों से अपने दायित्वों को समझने और मरीजों को परिवार के सदस्य की तरह मानकर इलाज करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मरीजों को केवल दवाओं की ही नहीं, बल्कि सहानुभूति और संवेदनशील व्यवहार की भी जरूरत होती है। आयुर्वेद, होम्योपैथिक और एलोपैथिक इलाज के साथ-साथ सहानुभूति भी मरीज को जल्दी ठीक होने में मदद करती है। इस अवसर पर चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित घोष, नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल और मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी भी उपस्थित रहे।
केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद, चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक सारिका मोहन, उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अजय कुमार सिंह, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पवन कुमार, केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के सीएमएस डॉ. प्रेम राज, सीएमओ डॉ. एनबी सिंह, केजीएमूय प्रवक्ता डॉ. केके सिंह शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमिय अग्रवाल ने किया।
फायर सेफ्टी ऑडिट का निर्देश
उड़ीसा के कटक में अस्पताल में आग लगने की घटना को देखते हुए ब्रजेश पाठक ने सभी अस्पतालों को अपने फायर सेफ्टी का ऑडिट करने का निर्देश दिया। इससे यहां इस तरह की घटना की आशंका को समाप्त किया जा सके।
दोगुने होंगे बेड, दुर्घटना के बाद एक घंटे के भीतर मिले इलाज
दुनिया भर में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं अपने देश में होती हैं। इसमें होने वाली मौतों का आंकड़ा भी अपने देश में ज्यादा है। इसलिए प्रधानमंत्री राहत योजना शुरू की गई है। इसका मकसद एक घंटे के भीतर घायल को इलाज दिलाना है। इसे ध्यान में रखते हुए यह विचार किया जा रहा है कि ट्रॉमा और इमरजेंसी केयर की बेड संख्या दोगुनी होनी चाहिए।
- अमित घोष, अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग
चार बातें बेहद अहम
दुर्घटना में बेहतर इलाज के लिए जरूरी है कि 112 सेवा को चिकित्सा विभाग से भी जोड़ा जाए। ऐसा होने पर इलाज की तैयारी की जा सकेगी। इसके साथ ही अस्पताल एक्सप्रेस वे पर स्थापित हों, मेडिकल कालेजों में ट्रॉमा केयर की सुविधा हो और उनमें संसाधन बढ़ाए जाएं।
- अवनीश अवस्थी, सलाहकार मुख्यमंत्री
दुर्घटना के रोगियों को सात दिनों तक निशुल्क इलाज
ट्रॉमा केयर की सुविधा बेहतर करने के लिए पीएम राहत योजना के तहत सात दिनों तक 1.50 लाख रुपये तक निशुल्क इलाज की व्यवस्था की गई है। इसे लागू किया जा रहा है। इसके साथ ही एंबुलेंस सर्विस, अस्पताल की सेवाएं बढ़ाने, क्षमता बढ़ाने और इमरजेंसी मेडिसिन के डॉक्टरों की संख्या बढ़ानी जानी चाहिए।
- डॉ. वीके पॉल, सदस्य, नीति आयोग
यातायात नियमों का हो पालन
चिकित्सीय सुविधाओं के साथ ही प्रदेश में यातायात नियमों के पालन पर भी ध्यान देना चाहिए। काफी हादसे यातायात नियमों का पालन न करने से होते हैं। इसलिए इन पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
मयंकेश्वर शरण सिंह, राज्य मंत्री, चिकित्सा शिक्षा विभाग
पांच वर्ष में बढ़ेंगे पांच हजार बेड
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रेम राज सिंह ने कहा कि प्रदेश भर में अगले पांच वर्ष में ट्रॉमा के पांच हजार बेड बढ़ाए जाने हैं। इससे सभी घायलों को आसानी से इलाज मिलेगा। इसमें आईसीयू और वेंटिलेटर बेड भी शामिल हैं।
इन बिंदुओं पर हुई चर्चा
- ट्रॉमा और इमरजेंसी सेवाओं का राज्यव्यापी नेटवर्क विकसित करना
- ट्रॉमा, इमरजेंसी और बर्न केयर सेवाओं का एकीकृत मॉडल विकसित करना
-राजमार्गों पर स्थित अस्पतालों और सीएचसी को फर्स्ट रिस्पॉन्स सेंटर के रूप में विकसित करना
-टेली मेडिसिन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों का लाभ सुदूर क्षेत्र में फैलाना
- इमरजेंसी में शुरुआती 48 घंटे निशुल्क इलाज की व्यवस्था
कार्यक्रम में पहुंचे अतिथि।
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